ऊना दलित उत्पीड़न मामले के आरोपियों के बरी होने पर मायावती ने जताई चिंता, कहा- गुजरात सरकार हाईकोर्ट में करे पैरवी
Lucknow News: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के बहुचर्चित 2016 ऊना दलित उत्पीड़न मामले में अधिकांश आरोपियों के बरी होने पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि पीड़ित परिवारों के पास हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक संसाधनों की भारी कमी है। उन्होंने गुजरात सरकार से मांग की है कि वह अपने स्तर पर हाईकोर्ट में मामले की प्रभावी पैरवी करे और पीड़ितों को सरकारी खर्च पर वकील मुहैया कराकर दोषियों को सख्त सजा दिलाए।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों…
— Mayawati (@Mayawati) August 7, 2026
40 में से 35 आरोपियों का बरी होना सरकारी लापरवाही का परिणाम
मायावती ने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि 2016 के इस जघन्य कांड के बाद वे खुद पीड़ितों से मिलने ऊना गई थीं और सच्चाई सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। देशव्यापी आक्रोश के बावजूद मार्च में स्थानीय अदालत द्वारा 40 में से 35 आरोपियों को बरी कर दिया जाना दलितों के प्रति सरकारी उदासीनता और द्वेष को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि फैसले के खिलाफ अपील दायर करने में पीड़ित परिवारों को आ रही वित्तीय बाधाओं से पूरे बहुजन समाज में भारी चिंता है।
बसपा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि गुजरात सरकार को अब भी अपनी गलती में सुधार करना चाहिए और पीड़ित परिवारों की संतुष्टि के अनुसार सरकारी खर्च पर विशेषज्ञ वकील उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में उनकी बसपा सरकार के दौरान भी गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का संवैधानिक और कानूनी प्रावधान किया गया था, ताकि किसी भी गरीब या वंचित को न्याय से वंचित न रहना पड़े।

