45 मिनट का दावा फेल! लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सफर हुआ दोगुना, 63 किमी में मिले 64 गड्ढे
Lucknow-Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर बड़े दावे किए गए थे कि करीब 63 किलोमीटर का सफर महज 45 मिनट में पूरा होगा। लेकिन उद्घाटन के एक महीने बाद जमीनी तस्वीर इन दावों से काफी अलग नजर आ रही है। सड़क पर जगह-जगह मरम्मत, पैचवर्क और असमतल सतह के कारण सफर का समय बढ़कर करीब 70 मिनट हो गया है।
Lucknow-Kanpur Expressway के करीब 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में 64 छोटे-बड़े गड्ढे मिले। इनमें से ज्यादातर को भर दिया गया है, लेकिन कई जगह सड़क को काटकर दोबारा बनाने का काम अब भी चल रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी कानपुर से लखनऊ की दिशा में दिखाई दी, जहां कई हिस्सों में लंबा पैचवर्क और सड़क की खुदाई चल रही थी।
जगह-जगह पैचवर्क, कई हिस्सों में सिर्फ एक लेन से गुजर रहे वाहन
लखनऊ से कानपुर की तरफ करीब 28 से 35 किलोमीटर के हिस्से में सड़क के किनारे और साइड लेन की मरम्मत होती मिली। यहां गिट्टी, डामर और निर्माण मशीनें भी सड़क किनारे जमा थीं। करीब 37.6 किलोमीटर पर पांच जगह नालियों का काम चलता मिला। कई स्थानों पर क्रैश बैरियर के कारण नालियों का रास्ता बाधित था, जिससे पानी की निकासी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
39.5 किलोमीटर के पास पुल पर दरार भरने का काम चल रहा था। इसके आगे करीब 39.8 किलोमीटर पर सड़क के बड़े हिस्से को काटकर मरम्मत की जा रही थी। यहां चार लेन में से सिर्फ एक लेन से यातायात गुजर रहा था।
Lucknow-Kanpur Expressway पर दोनों तरफ करीब 42 स्थानों पर मिट्टी के बड़े ढेर भी मिले। 47 किलोमीटर के आसपास तीन बड़े पैचवर्क दिखाई दिए। करीब 50 किलोमीटर तक सड़क की सतह बेहतर थी, लेकिन 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी सात स्थानों पर सड़क असमतल महसूस हुई।

करीब 60 किलोमीटर के पास लगभग 100 मीटर लंबे हिस्से को पूरी तरह उखाड़कर दोबारा बनाया जा रहा था। वहीं 64 किलोमीटर के पास पहले किया गया पैचवर्क फिर उखड़ा मिला और मिट्टी धंसने से उसमें दरारें भी दिखाई दीं। 69 और 69.6 किलोमीटर के पास भी बड़े पैचवर्क का काम चल रहा था। यहां तीन लेन पर काम होने के कारण यातायात सिर्फ एक लेन से गुजर रहा था।
नालियां और घास भी बता रही निर्माण की कहानी
Lucknow-Kanpur Expressway के कई हिस्सों में सड़क किनारे ग्रेन्युलर शोल्डर पर करीब दो-दो फीट तक घास उगी दिखाई दी। सर्विस लेन में भी ढाई फीट तक लंबी घास मिली। निर्माण विशेषज्ञों के मुताबिक पानी की सही निकासी न होने पर सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर हो सकती है, जिसका असर बाद में डामर की ऊपरी सतह पर पड़ता है।
कई जगह मिट्टी के ढलान भी कटे हुए मिले और मिट्टी नीचे आने के कारण किनारे की संरचना को दोबारा दुरुस्त करने की जरूरत दिखाई दी। लखनऊ की तरफ लौटते समय 45 से 50 किलोमीटर के बीच कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी सतह असमतल मिली। 36 किलोमीटर और 30.6 किलोमीटर के पास भी बड़े पैचवर्क का काम जारी था।
उद्घाटन के एक महीने में ही इतनी मरम्मत क्यों?
सड़क पर लगातार सामने आ रही समस्याओं के बीच पीएनसी इंफ्राटेक ने कई स्थानों पर मरम्मत का काम तेज कर दिया है। मौसम साफ होने के बाद बुधवार को काम की रफ्तार भी बढ़ी।
हालांकि, Lucknow-Kanpur Expressway के उद्घाटन को अभी एक महीना ही हुआ है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर पैचवर्क, सड़क की खुदाई और दोबारा निर्माण की जरूरत ने इसकी निर्माण गुणवत्ता और तैयारियों पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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