यूपी में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, दूसरे मातृत्व अवकाश पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के मातृत्व अवकाश को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि पहले मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरी बार मातृत्व अवकाश लेने पर रोक नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपनाया गया मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों पर प्रभावी होगा।
सीमा को 180 दिन की छुट्टी देने का आदेश
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सीमा की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया। कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को मातृत्व अवकाश खारिज करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। संबंधित अधिकारी को सीमा को 17 जून से 13 दिसंबर 2026 तक 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने और सभी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया गया है।
सीमा सुलतानपुर रोड स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में कार्यरत हैं। उन्होंने 17 जून से 13 दिसंबर तक छुट्टी के लिए आवेदन किया था। विभाग ने वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियम 153(1) का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया था।
कानून में दो साल की शर्त नहीं
सीमा की ओर से अधिवक्ता प्रशांत देव सिंह ने कोर्ट में अनुपम यादव, अंशु रानी और सताक्षी मिश्रा के मामलों के फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम को अपने कर्मचारियों पर लागू किया है।
कोर्ट ने माना कि वित्तीय हस्तपुस्तिका के प्रावधान केवल कार्यकारी निर्देश हैं, जबकि मातृत्व लाभ अधिनियम वैधानिक कानून है। दोनों में टकराव होने पर कानून प्रभावी रहेगा। अदालत ने कहा कि अधिनियम में दूसरी गर्भावस्था के लिए दो मातृत्व अवकाश के बीच दो साल का अंतर रखने की कोई शर्त नहीं है। इसलिए इस आधार पर छुट्टी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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