मुजफ्फरनगर में 30 मुकदमों वाला हिस्ट्रीशीटर रिहाई के बाद लापता, हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच
Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव के लापता होने का मामला अब सीबीआई जांच तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर नाराजगी जताते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
मुत्तलिव के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में करीब 30 मुकदमे दर्ज हैं। 17 दिसंबर 2025 के हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद उसे 4 मई 2026 को जेल से रिहा किया गया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, रिहाई के तुरंत बाद पुरकाजीपुर पुलिस ने मुत्तलिव और उसके पिता को हिरासत में लिया। पिता 7 मई को छोड़ दिए गए, लेकिन मुत्तलिव का अब तक पता नहीं चला। उसके भाई आलम ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी।
पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सरकार ने बताया कि मुत्तलिव के खिलाफ सत्र परीक्षण संख्या 1344/2012 में गैर-जमानती वारंट जारी था। हालांकि, वारंट की तारीख को लेकर रिकॉर्ड में विरोधाभास मिला। पहले 13 मई और बाद में 18 जून 2026 की तारीख सामने आई। एसएचओ डॉ. मानवेंद्र सिंह भाटी कोर्ट में पेश हुए।
कोर्ट ने पाया कि 15 अगस्त को बनी विशेष टीम ने सार्वजनिक स्थानों पर फोटो चस्पा करने के अलावा ठोस जांच नहीं की। परिजनों, पड़ोसियों और दोस्तों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।
CBI तीन हफ्ते में देगी रिपोर्ट
कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली से जांच को गंभीरता से न किए जाने का संकेत मिलता है। रिकॉर्ड में काटछांट की बात भी सामने आई, जिसे एसएचओ ने कांस्टेबल की लापरवाही बताया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट ने कहा कि मुत्तलिव के गायब होने के पीछे पुलिस कार्रवाई या खुद छिपने, दोनों संभावनाओं की जांच जरूरी है। CBI को केस डायरी लेकर जांच शुरू करने और तीन हफ्ते में प्रारंभिक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।
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