280 चुनाव लड़ने वाले ‘धरतीपकड़’ नागरमल बाजोरिया का निधन, 97 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Nagarmal Bajoria Death : वार्ड सदस्य से लेकर राष्ट्रपति पद तक चुनाव लड़कर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरतीपकड़’ का निधन हो गया। उन्होंने गुरुवार को पटना में इलाज के दौरान 97 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवन में करीब 280 चुनाव लड़े, लेकिन किसी भी चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बावजूद चुनाव लड़ने का उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।

इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के खिलाफ लड़ा चुनाव

भागलपुर के रहने वाले नागरमल बाजोरिया अलग-अलग चुनावों में बड़े राजनीतिक नेताओं के सामने मैदान में उतर चुके थे। उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली, राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा। इसके अलावा संजय गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं के खिलाफ भी उन्होंने नामांकन दाखिल किया था।

वर्ष 1969 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार वीवी गिरि के खिलाफ भी नामांकन किया था। साल 2012 में उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल किया, हालांकि उनका नामांकन खारिज हो गया था। उनका आखिरी चुनाव 2019 में बताया जाता है।

10-15 दिनों से चल रहा था इलाज

परिजनों के मुताबिक, पिछले करीब 10 से 15 दिनों से नागरमल बाजोरिया की तबीयत खराब थी और उनका इलाज पटना के पीएमसीएच में चल रहा था। गुरुवार रात करीब नौ बजे उनका पार्थिव शरीर पटना से भागलपुर लाया गया। इसके बाद बरारी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

नागरमल बाजोरिया के चार बेटे और एक बेटी थे। उनके एक बेटे विजय बाजोरिया का पहले ही निधन हो चुका है। उनके अन्य बेटे सतीश, अजय और दिलीप कारोबार से जुड़े हैं। वह खुद मनिहारी का कारोबार करने के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय रहे।

लाहौर में हुआ था जन्म, भागलपुर को बनाया कर्मभूमि

नागरमल बाजोरिया का जन्म वर्ष 1930 में पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। देश की आजादी से पहले ही उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह कन्या विवाह, गरीब महिलाओं की मदद और बच्चों की पढ़ाई जैसे सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे।

उनके लिए चुनाव केवल जीत या हार का मामला नहीं था। वह इसे लोकतंत्र में अपनी भागीदारी का एक माध्यम मानते थे। यही वजह रही कि उम्र बढ़ने के बावजूद उन्होंने चुनाव लड़ना जारी रखा और ‘धरतीपकड़’ के नाम से पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना ली।

गधों के गले में तख्तियां डालकर निकाली थी रैली

नागरमल बाजोरिया के चुनाव प्रचार का अंदाज भी काफी अलग था। उनके कपड़ों पर लिखे नारे और नामांकन रैलियां अक्सर लोगों का ध्यान खींचती थीं। वर्ष 2005 में भ्रष्टाचार के खिलाफ निकाली गई उनकी एक नामांकन रैली खास तौर पर चर्चा में रही थी। इस दौरान उन्होंने गधों के गले में राजनीतिक संदेश लिखी तख्तियां डाल रखी थीं। उनकी इस रैली को देखने के लिए स्टेशन चौक पर लोगों की भीड़ जुट गई थी।

उनके निधन पर भागलपुर के भाजपा विधायक रोहित पांडेय समेत भाजपा प्रदेश महामंत्री और पार्षद डॉ. प्रीति शेखर और मोंटी जोशी ने भी शोक जताया।

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