Tata Sons और Tata Trusts के विवाद के बीच, शेयरों में भारी गिरावट, निवेशकों के इतने हज़ार करोड़ डूबे

Tata Group Shares News : टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में नेतृत्व और संभावित लिस्टिंग को लेकर Tata Sons और Tata Trusts के बीच मतभेद खुलकर सामने आने के बाद शुक्रवार, 18 सितंबर को टाटा ग्रुप के कई शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Tata Chemicals, Tata Investment Corporation, TCS, Tata Motors और Tata Power समेत कई शेयरों पर दबाव रहा। कुछ शेयरों में गिरावट करीब 8% तक पहुंच गई।

बाजार में गिरावट की मुख्य वजह Tata Trusts का वह रुख माना जा रहा है, जिसमें ट्रस्ट्स ने N. Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है और Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर भी असहमति जताई है। इससे निवेशकों के बीच Tata Group की आगे की कॉरपोरेट गवर्नेंस और नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।

क्या है Tata Sons में पूरा विवाद?

17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने N. Chandrasekaran को अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बोर्ड ने Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की दिशा में भी आगे बढ़ने का फैसला किया। चंद्रशेखरन के पक्ष में बोर्ड का वोट 4-1 रहा।

लेकिन Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने इस फैसले का विरोध किया। Tata Trusts का कहना है कि चंद्रशेखरन ने अगस्त में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा चेयरमैन बनने की इच्छा नहीं जताई थी और यह फैसला अंतिम माना गया था। ट्रस्ट्स ने दोबारा नियुक्ति को कंपनी के Articles of Association के तहत कानूनी रूप से चुनौती दी है।

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। ट्रस्ट्स का कहना है कि महत्वपूर्ण फैसलों में उसके नामित निदेशकों की सहमति जरूरी है। दूसरी ओर, Tata Sons के बोर्ड ने नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। ऐसे में अब शेयरधारकों की मंजूरी, कंपनी के नियमों और आगे की कानूनी प्रक्रिया की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

Tata Sons की लिस्टिंग पर भी मतभेद

विवाद सिर्फ चंद्रशेखरन की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। Tata Sons की संभावित IPO/लिस्टिंग को लेकर भी Tata Trusts और बोर्ड के बीच मतभेद है। बोर्ड ने RBI के नियामकीय निर्देशों के बाद लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है, जबकि Noel Tata की अगुवाई वाला Tata Trusts इस रास्ते को लेकर सहमत नहीं है।

इस बीच Tata Sons के दूसरे बड़े शेयरधारक Shapoorji Pallonji (SP) Group ने Tata Sons में अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर करीब 25,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना भी प्रस्तावित की है। इस घटनाक्रम ने भी निवेशकों का ध्यान Tata Sons की हिस्सेदारी और संभावित लिस्टिंग पर केंद्रित किया है।

Tata के शेयरों में कितनी गिरावट आई?

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में Tata Chemicals सबसे ज्यादा दबाव में रहा और करीब 8% तक गिर गया। Tata Investment Corporation में करीब 3-4%, TCS में करीब 3% और Tata Motors में करीब 3% तक की गिरावट देखी गई। Tata Motors Passenger Vehicles और Tata Power में भी गिरावट रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, गिरावट की वजह से Tata Group की कई सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में हजारों करोड़ रुपये की कमी आई। हालांकि, शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं और दिन के अंत तक इन शेयरों की स्थिति शुरुआती कारोबार से अलग हो सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड के फैसले के बाद कई Tata Group stocks में तेजी आई थी, लेकिन अगले ही दिन Tata Trusts के विरोध और नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठने के बाद शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

अब बाजार की नजर Tata Sons की AGM, चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर आगे की प्रक्रिया, Tata Trusts के रुख और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। फिलहाल यह मामला बोर्ड के फैसले से आगे बढ़कर शेयरधारकों और संभावित कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

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