जलवायु सम्मेलन में पीएम मोदी बोले- ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी में भारत ने रचे नए कीर्तिमान
Sandesh Wahak Digital Desk: ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पर्यावरण और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज का नया भारत स्वच्छ गतिशीलता और ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को तेजी से अपना रहा है। देश की पहली और दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन का हाल ही में हुआ शुभारंभ इसी हरित क्रांति का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा के विविध स्रोतों का उल्लेख करते हुए बताया कि बीते 12 वर्षों में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में तीन गुना और जल विद्युत ऊर्जा में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, परमाणु ऊर्जा और निजी क्षेत्र की भागीदारी से देश की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में 400% से अधिक का शानदार उछाल आया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व उछाल
ई-मोबिलिटी पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 से पहले जहां सालाना सिर्फ 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे, वहीं बीते वर्ष यह आंकड़ा 25 लाख के पार पहुंच गया। इसके अलावा, Fastag व्यवस्था से ईंधन और समय दोनों की बचत हुई है। मेट्रो कनेक्टिविटी के मामले में भारत ने लंबी छलांग लगाई है- 2014 में केवल 5 शहरों (250 किमी) में सीमित मेट्रो नेटवर्क आज 20 से अधिक शहरों में फैल चुका है, जो 1,000 किमी से अधिक लंबा है। रेलवे का 100% विद्युतीकरण होने से करोड़ों लीटर डीजल की बचत हो रही है।
जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती की ओर मजबूत कदम
स्टेनेबल डेवलपमेंट का उदाहरण देते हुए उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। देश भर में 70,000 से अधिक ‘अमृत सरोवर’ और ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत लगभग 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं निर्मित की जा चुकी हैं। वहीं, ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के जरिए 12.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है और जलवायु-अनुकूल 3,000 से अधिक फसलों की किस्में विकसित की गई हैं।
सर्कुलर इकोनॉमी और वन क्षेत्र में सुधार
पीएम मोदी ने जानकारी दी कि पिछले 12 वर्षों में देश का अत्यधिक घना वन क्षेत्र 22% बढ़ा है। प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए भारत ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है और ‘3R’ के मॉडल को अपनाया है। गोबरधन योजना के जरिए ग्रामीण भारत में जैविक कचरे को बहुमूल्य संसाधन में बदला जा रहा है।
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