मिठु मुखर्जी का निधन, 71 साल की उम्र में कैंसर से हारीं जंग, बंगाली सिनेमा में शोक
Bollywood News: बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिठु मुखर्जी का 71 साल की उम्र में निधन हो गया।
उन्होंने रविवार रात मुंबई के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह करीब एक साल से कैंसर का इलाज करा रही थीं।
उनके निधन की खबर से बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।
17 साल की उम्र में शुरू किया था फिल्मी करियर
मिठु मुखर्जी का जन्म 1955 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा।
1972 में चित्त बोस की फिल्म ‘शेष पर्व’ से उन्होंने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में वह शमित भंजा के साथ नजर आई थीं।
इसके बाद दिनेन गुप्ता की ‘मर्जीना अब्दुल्ला’ ने उन्हें पहचान दिलाई। फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। 1970 और 1980 के दशक में वह बंगाली सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बन गई थीं।
उन्होंने उत्तम कुमार, सौमित्र चट्टोपाध्याय और रंजीत मलिक जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया।
इन फिल्मों में किया काम
मिठु मुखर्जी की प्रमुख बंगाली फिल्मों में ‘निशिकन्या’, ‘मौचाक’, ‘काबी’, ‘होटल स्नो फॉक्स’, ‘प्रतिमा’, ‘बंधन’, ‘प्रार्थना’ और ‘स्वयंसिद्धा’ शामिल हैं।
अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस के चलते उन्होंने अपने दौर में खास पहचान बनाई।
उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया। 1976 में दुलाल गुहा की ‘खान दोस्त’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया।
इसके बाद वह बासु चटर्जी की ‘सफेद झूठ’, ‘दिललगी’ और ‘दो लड़के दोनों कड़के’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।
1990 में आखिरी बार पर्दे पर आईं
मिठु मुखर्जी ने 1980 के दशक में फिल्म ‘दुजाने’ के बाद अभिनय से ब्रेक लिया था। करीब एक दशक बाद 1990 में चंद्रा बरोट की ‘आश्रिता’ से उन्होंने वापसी की।
यह उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री और सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी और काफी समय से मुंबई में रह रही थीं।
उनके निधन पर फिल्म जगत की कई हस्तियों और संगठनों ने शोक जताया है। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया।
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