DM मेधा रूपम के केस के लिए बेंच ही बदल दी? SC के रोस्टर पर सवाल, सुनवाई का ऑडियो भी म्यूट

DM Medha Roopam Case: नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में लिस्टिंग को लेकर सवाल उठे हैं। इन याचिकाओं में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें छात्रा आकृति चौधरी (Akriti Chaudhary) की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत रद्द की गई थी।

बुधवार को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने मामले पर सुनवाई की और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत रद्द करने के साथ मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद यह निर्देश भी फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।

रोस्टर से अलग बेंच में कैसे पहुंचा मामला?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 जुलाई 2026 से लागू सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर में Habeas Corpus और Preventive Detention से जुड़े मामले शुरुआती चार पीठों को दिए गए हैं। इनमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठें शामिल हैं।

इसके बावजूद मेधा रूपम (DM Medha Roopam Case) और यूपी सरकार की याचिकाएं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के सामने सूचीबद्ध हुईं। खास बात यह है कि इसी नोएडा श्रमिक प्रदर्शन (Noida Workers’ Protest) से जुड़े कुछ दूसरे मामले पहले से जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के सामने लंबित हैं। इसलिए इस लिस्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट में यह संभावना बताई गई है कि मामला “any other matters specially assigned” श्रेणी के तहत विशेष रूप से इस पीठ को सौंपा गया हो सकता है। हालांकि इस बारे में कोई सार्वजनिक कारण सामने नहीं आया है।

सुनवाई का ऑडियो क्यों म्यूट हुआ?

DM Medha Roopam Case की सुनवाई के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यवाही का ऑडियो म्यूट करने का निर्देश दिया। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के रिपोर्टर कोर्टरूम में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो सकते थे, ऑडियो म्यूट होने के बाद वे सुनवाई की कार्यवाही सुन नहीं पाए।

लाइव लॉ ने इस घटनाक्रम को मीडिया एक्सेस से जुड़ा सवाल बताया है और कहा है कि मामले में व्यक्तिगत गोपनीयता का मुद्दा नहीं था। वहीं, मामले की लिस्टिंग को लेकर उठे सवालों का अर्थ यह नहीं है कि पीठ ने कोई अनुचित आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है और मामले में आगे की कार्यवाही जारी रहेगी।

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