19 हिंदू लड़कियों से रेप का दावा, KGMU धर्मांतरण केस में STF रिपोर्ट से मचा हड़कंप
KGMU Conversion Case: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में धर्मांतरण नेटवर्क की जांच को लेकर नया खुलासा हुआ है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गृह विभाग ने रिपोर्ट की कॉपी KGMU प्रशासन को भेजकर उसमें दर्ज आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई करने को कहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेडिकल कॉलेजों में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से एक नेटवर्क संचालित था। इसके जरिए हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने और नए मुस्लिम मेडिकल छात्रों को मजहबी तौर पर संगठित करने की कोशिश की जाती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नेटवर्क के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप, मैगजीन और बुकलेट का इस्तेमाल किया जाता था।
डॉ. रमीज के 19 लड़कियों से रेप के दावे का जिक्र
STF रिपोर्ट में KGMU के पूर्व रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज का भी जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. रमीज ने अपने एक दोस्त से बातचीत के दौरान दावा किया था कि उसने 19 हिंदू लड़कियों से रेप किया है। यह रिपोर्ट में दर्ज कथित बातचीत का दावा है, इन सभी मामलों में अपराध साबित होने की पुष्टि नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉ. रमीज को मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। KGMU प्रशासन ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की थी।
कई मेडिकल कॉलेजों में नेटवर्क सक्रिय होने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों तक फैला था। इसमें SNMC आगरा के पासआउट मोहम्मद कैफ के अलावा KGMU से जुड़े मोहम्मद एहसान, अमन मलिक, शदन शमीम, मोहम्मद अयान, मोहम्मद जहीर, मोहम्मद अमन और शाबिर खान समेत कई लोगों के नाम दर्ज हैं।
STF का दावा है कि इन लोगों के कई हिंदू महिला रेजिडेंट डॉक्टरों से नजदीकी संबंध थे और उन्हें इस्लामिक विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की गई।
12 लोगों और महिला प्रोफेसर का भी नाम
रिपोर्ट में KGMU में फिलहाल कार्यरत 12 लोगों के नाम होने की बात कही गई है। इन पर धर्म के आधार पर भेदभाव करने के आरोपों का उल्लेख है। एक महिला प्रोफेसर का भी जिक्र किया गया है, जिन पर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ से जुड़े लोगों को समर्थन देने का आरोप है। अब गृह विभाग के निर्देश के बाद KGMU प्रशासन को रिपोर्ट में दर्ज आरोपों की जांच कर विभागीय कार्रवाई करनी है।
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