पीलीभीत में 200 एकड़ में बनेगा बायो-फार्मा पार्क, वैक्सीन-इंसुलिन का होगा उत्पादन
UP Bio Pharma Project: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में दवा और बायोटेक्नोलॉजी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। यहां 200 एकड़ जमीन पर बायो-फार्मा पार्क विकसित किया जाएगा। इसमें वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी आधुनिक दवाओं के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) पीलीभीत की अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है। इसी परियोजना के तहत बायो-फार्मा पार्क के लिए 200 एकड़ जमीन तय की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश में दवा निर्माण के साथ अनुसंधान, नई तकनीक और निवेश को बढ़ावा देना है।
951.79 एकड़ में विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र, 14 प्लॉट आवंटन के लिए उपलब्ध
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर और विषय विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर औद्योगिक विकास को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने पर है। इसी सोच के तहत तराई क्षेत्र के पीलीभीत में यह बड़ी परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि भरा पचपेड़ा में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र में अलग-अलग कामों के लिए जमीन तय की गई है। इसमें 575.79 एकड़ औद्योगिक भूखंडों, 60.98 एकड़ कॉमन फैसिलिटी, 109.23 एकड़ हरित क्षेत्र और 96.20 एकड़ सड़क नेटवर्क के लिए रखी गई है। इसके अलावा आबादी क्षेत्र और अन्य जरूरतों के लिए भी जमीन का प्रावधान किया गया है।
फिलहाल इस औद्योगिक क्षेत्र में 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं। वहीं, 200 एकड़ में बायो-फार्मा पार्क विकसित करने की योजना है। डॉ. सिंह के मुताबिक, इससे दवा और जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े उद्योगों को प्रदेश में अपना कारोबार शुरू करने का अवसर मिलेगा।
वैक्सीन, इंसुलिन और जीन थेरेपी बनाने वाली इकाइयों को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि बायो-फार्मा पार्क को दवा निर्माण और बायोटेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। यहां वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज बनाने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
ये सभी आधुनिक चिकित्सा के महत्वपूर्ण उत्पाद हैं और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इनकी भूमिका होती है। ऐसे में पार्क बनने से उत्तर प्रदेश में उच्च तकनीक वाली दवाओं के निर्माण की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे बायोटेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन, अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास के लिए औद्योगिक माहौल तैयार होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पीलीभीत का तापमान और जलवायु बायो-फॉर्मूलेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिए अनुकूल मानी जाती है। जैविक दवाओं के निर्माण और भंडारण में तापमान का खास ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में यहां की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां इस उद्योग के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
नेपाल सीमा से नजदीकी और कनेक्टिविटी से मिलेगा फायदा
इस परियोजना के लिए पीलीभीत की भौगोलिक स्थिति भी अहम मानी जा रही है। यह क्षेत्र नेपाल सीमा के करीब है। यहां रेलवे कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। इसके अलावा पीलीभीत से बरेली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक पहुंचना आसान है।
भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से करीब 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर और लखनऊ व दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इस कनेक्टिविटी से कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नेपाल सीमा के पास होने से भविष्य में निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
परियोजना में केवल औद्योगिक इकाइयां लगाने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा क्षेत्र के लिए कुशल कर्मचारी तैयार करने की भी योजना है। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट विकसित करने के साथ कौशल प्रशिक्षण और इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग बनाए जाने का प्रस्ताव है।
इससे युवाओं को नई तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सकेगा। साथ ही स्टार्टअप और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार कर रोजगार से जोड़ने की भी योजना है।
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