मोहम्मद शमी को टेस्ट टीम से बाहर रखने पर भड़के रवि शास्त्री, चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पूर्व भारतीय कोच ने शमी के संन्यास पर जताई निराशा, कहा- अनुभवी तेज गेंदबाज में अभी 30-40 विकेट लेने की क्षमता थी

Sports News: भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

शास्त्री का मानना है कि शमी को टेस्ट टीम में एक और मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अनुभवी गेंदबाज में अभी 30 से 40 विकेट और लेने की क्षमता थी, लेकिन उन्हें अपनी काबिलियत साबित करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे से पहले रविवार को ‘एक्स्ट्रा इनिंग्स’ कार्यक्रम में शास्त्री ने कहा कि देश के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को इस तरह विदा होते देखना दुखद है।

उनके मुताबिक, शमी को पिछले 12 महीनों में खेलने का मौका मिलना चाहिए था और उन्हें टेस्ट टीम में भी जगह दी जा सकती थी।

शमी की फिटनेस और चयन पर उठाए सवाल

वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बाद शमी लगातार चोटों से जूझते रहे। फरवरी 2024 में उनके टखने की सर्जरी हुई।

इसके बाद घुटने की परेशानी ने भी उनकी वापसी को प्रभावित किया। चोटों के कारण वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में भी नहीं खेल सके।

वहीं, 2025 में इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में चयन नहीं होने पर मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा था कि पांच टेस्ट मैचों की चुनौतीपूर्ण सीरीज के लिहाज से शमी का वर्कलोड पर्याप्त नहीं था। मेडिकल टीम ने भी उनके चयन की सलाह नहीं दी थी।

Mohammed Shami

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शास्त्री ने कहा कि केवल जिम में फिट होना काफी नहीं है। खिलाड़ी को मैदान पर लगातार गेंदबाजी करने में सक्षम होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शमी घरेलू क्रिकेट में लगातार ओवर फेंक रहे थे, ऐसे में उन्हें एक और मौका नहीं मिलना निराशाजनक है।

बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में किया शानदार प्रदर्शन

भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान शमी ने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से हिस्सा लिया।

दलीप ट्रॉफी 2026-27 में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने तीन मैचों में सात विकेट हासिल किए और टीम को खिताब दिलाने में योगदान दिया।

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के शुरुआती तीन मुकाबलों में भी शमी ने 14 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान उनका औसत 14 रहा।

दिल्ली के खिलाफ उन्होंने 5/59 और महाराष्ट्र के खिलाफ 4/37 का प्रदर्शन किया।

शास्त्री ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शमी बंगाल के लिए हर मैच खेल रहे थे और 15 से 20 ओवर तक गेंदबाजी कर रहे थे।

उनके मुताबिक, किसी खिलाड़ी की मैच फिटनेस परखने का यह एक अहम पैमाना है।

टेस्ट से संन्यास के बाद भी जारी रहेगा क्रिकेट करियर

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद मोहम्मद शमी का क्रिकेट करियर जारी रहेगा। वह वनडे और टी20 प्रारूप में खेलना चाहते हैं और 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

भारत के लिए शमी ने आखिरी मुकाबला चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में खेला था।

इस टूर्नामेंट में उन्होंने पांच मैचों में नौ विकेट लिए थे और वरुण चक्रवर्ती के साथ भारत के संयुक्त रूप से सबसे सफल गेंदबाज रहे थे।

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