बरेली में फर्जी कंपनी बनाकर चल रहा था हवाला का खेल, कैश और जाली दस्तावेजों के साथ दो गिरफ्तार
Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और अवैध धन के प्रवाह के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना बारादरी पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने मिलकर एक अंतरराज्यीय हवाला रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक बंद पड़ी कंपनी के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर करोड़ों का टर्नओवर करने वाले दो मुख्य अभियुक्तों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से 35 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी, चार मोबाइल फोन और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं।
टोकन सिस्टम से सुरक्षित किया जाता था संदिग्ध लेन-देन
पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में इस सिंडिकेट के काम करने के अनोखे तरीके का खुलासा हुआ है। आरोपी काफी समय से बंद पड़ी केजीएन नामक कंपनी के नाम पर जाली बैंक खाते संचालित कर रहे थे। इन खातों में देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी-बड़ी रकमें ट्रांसफर की जाती थीं। इसके बाद आरोपी इस पूरी धनराशि को बैंक से नकद (कैश) निकालते थे और टोकन प्रणाली के माध्यम से हवाला नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध लोगों तक सुरक्षित पहुंचा देते थे। इस पूरे नेटवर्क में सुरक्षा के लिहाज से पैसे भेजने और प्राप्त करने वाले दोनों पक्षों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती थी।

व्हाट्सएप चैट और दुबई कनेक्शन का पर्दाफाश
गिरफ्तार अभियुक्त जमीर अहमद ने पुलिस पूछताछ में कुबूल किया कि वह व्हाट्सएप के जरिए दुबई में बैठे जीशान अली नामक व्यक्ति के लगातार संपर्क में था। जीशान के कहने पर ही मोईन अली के नाम से जाली दस्तावेज तैयार कर यह फर्जी खाता खोला गया था।
वहीं, दूसरे आरोपी जगदीश चोटियां (मूल निवासी बीकानेर, राजस्थान) ने बताया कि वह पिछले चार साल से इस सिंडिकेट में सक्रिय है और तय कमीशन लेकर भारी रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक डिलीवर करता था। पुलिस अब इस मामले में प्रकाश में आए अन्य नामजद मास्टरमाइंड्स जीशान अली, मोईन अली, लालचन्द्र और धम्माराम की तलाश में टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
बारादरी थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम का नेतृत्व बारादरी के प्रभारी निरीक्षक बिजेन्द्र सिंह, एसओजी प्रभारी देवेन्द्र सिंह धामा और वरिष्ठ उपनिरीक्षक शिवेन्द्र सिंह भदौरिया द्वारा किया गया।
रिपोर्ट- रंजीत बिसारिया

