आजमगढ़ मदरसा फर्जीवाड़े में बड़ा एक्शन, फर्जी दानपत्र से मान्यता लेने के आरोप में 22 पर FIR
Azamgarh Madrasa Fraud: आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा जामिया नूरुल उलूम (Jamia Noorul Uloom) की मान्यता निलंबित होने के बाद अब पूर्व और वर्तमान प्रबंध समिति के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने 1998 और 2025 में बनी दोनों प्रबंध समितियों के 11-11 सदस्यों समेत कुल 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी मुबारकपुर को पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह कार्रवाई मदरसे की मान्यता के लिए भूमि और भवन से जुड़े अभिलेखों में कथित फर्जीवाड़े की जांच के बाद की जा रही है। मदरसा शिक्षा परिषद (Madrasa Education Council) की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही के आदेश पर हुई जांच में 1998 में आलिया स्तर की स्थायी मान्यता लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी दानपत्र इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।
दानपत्र में आजमगढ़, जबकि जमीन मऊ में थी
शिकायतकर्ता हाजी अली इमाम ने मदरसे की मान्यता से जुड़े भूमि और भवन के दस्तावेजों पर सवाल उठाए थे। जांच में 20 जून 1997 के दानपत्र में जमीन को तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, आजमगढ़ में बताया गया था। जबकि 1988 में मऊ जिला बनने के बाद मोहम्मदाबाद गोहना मऊ का हिस्सा था।
जांच में 1998 से 2004 तक के फसली खसरा अभिलेखों में भी संबंधित जमीन पर मदरसे का उल्लेख नहीं मिला। इसके अलावा दानपत्र में प्रबंधक निहाल अहमद का नाम था, जबकि उस समय वैध प्रबंधक जहीन अहमद बताए गए हैं। प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के कई मौके दिए गए, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
रजिस्ट्रार के निर्देश के बाद सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज कार्यालय से दोनों समितियों का विवरण मांगा गया। अब इसी आधार पर 1998 की तत्कालीन समिति और 2025 की वर्तमान समिति के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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