Bsati News: दावों के बीच अंधेरे में यूपी का बेलघाट गांव, 4 दिन से फुंका है ट्रांसफार्मर
Bsati News: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती और तकनीकी खराबी ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। जहाँ एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा लगातार निर्बाध बिजली आपूर्ति (24 घंटे बिजली) के बड़े-बड़े दावे कर सुर्खियां बटोर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट है। यूपी के बस्ती जिले के कप्तानगंज विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाला बेलघाट गांव पिछले चार दिनों से पूरी तरह से अंधेरे में डूबा हुआ है। बीते दिनों आई तेज आंधी-तूफान के कारण दुबौला हरदी-फीडर से जुड़े इस गांव का मुख्य ट्रांसफार्मर जल गया था, जिसे ठीक करने या बदलने की जहमत अब तक बिजली विभाग ने नहीं उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उमस और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच वे लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं। विभाग के टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल करने पर सिर्फ एक रटा-रटाया जवाब मिलता है कि ‘आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है, जल्द समाधान होगा।’ परेशान होकर ग्रामीणों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और ऊर्जा मंत्री को टैग करते हुए अपनी गुहार लगाई, लेकिन सरकारी तंत्र की ओर से कोई रिप्लाई या प्रतिक्रिया नहीं मिली। विभाग के इस ठंडे रवैये से जनता में भारी आक्रोश और गुस्सा है।
बिल देने के बाद भी चंदा वसूलने की नौबत
इस बिजली संकट के बीच बिजली विभाग के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की कहानी भी सामने आई है। बेलघाट गांव के निवासियों ने आरोप लगाया है कि उपकेंद्र पर संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर तैनात स्थानीय लाइनमैन नया ट्रांसफार्मर लगवाने के नाम पर ग्रामीणों से मोटी रकम (रिश्वत) की डिमांड कर रहा है। जब विभाग से कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो बेबस ग्रामीणों ने मजबूरी में आपस में चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है ताकि लाइनमैन को पैसे देकर जल्द से जल्द गांव की बत्ती गुल होने से बचाई जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जब वे हर महीने पूरी ईमानदारी के साथ अपना बिजली का बिल जमा करते हैं, तो समय पर ट्रांसफार्मर बदलना और बिजली देना विभाग की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे में अवैध रूप से पैसों की मांग करना पूरी तरह गलत है। चंदा जुटाने के बाद भी ट्रांसफार्मर कब तक आएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जनता की इन गंभीर शिकायतों पर ऊर्जा मंत्री और आला अधिकारी ‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जिन्हें आम जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
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