आनंद नारायण मुल्ला: साहित्य के सुधारक और देशभक्त कवि : डॉ. एहतेशाम अहमद खान
Lucknow News: बीसवीं सदी के प्रारंभ में उर्दू साहित्य को नई दिशा देने वाले महान शायर आनंद नारायण मुल्ला का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे केवल एक शायर ही नहीं, बल्कि साहित्यिक चेतना के सुधारक और सच्चे देशभक्त भी थे। उनकी शायरी में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रप्रेम की गहरी झलक मिलती है।
ये विचार डॉ. एहतेशाम अहमद खान ने अवध वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के आर्थिक सहयोग से यूपी प्रेस क्लब में आयोजित संगोष्ठी “आनंद नारायण मुल्ला: कला एवं व्यक्तित्व” में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मुल्ला की शायरी समय की जरूरतों के अनुरूप है और आज भी प्रासंगिक बनी हुई है। उनकी रचनाओं में विचारों की गहराई और इंसानियत की सच्ची तस्वीर दिखाई देती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा सिद्दीकी ने प्रभावशाली ढंग से किया। संगोष्ठी की संयोजिका एवं अवध वेलफेयर फाउंडेशन की अध्यक्ष सबीहा सुल्ताना ने अपने स्वागत भाषण में संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत शॉल और गुलदस्ते भेंट कर किया गया।

समाज के दुख-दर्द को समझना ही सच्चा जीवन
कार्यक्रम की अध्यक्षता फिदा हुसैन अंसारी (पूर्व अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग) ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मुल्ला के अनुसार जीवन केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द को समझना और उसे प्राथमिकता देना ही सच्चा जीवन है। उनकी शायरी किसी तयशुदा ढांचे की नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों के करीब है। उन्होंने यह भी कहा कि मुल्ला की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दर्दमंद और संवेदनशील अभिव्यक्ति है।

मुल्ला की ग़ज़लों में देश के प्रति गहरी चिंता
विशिष्ट अतिथि अनीस मंसूरी (पूर्व राज्य मंत्री) ने कहा कि मुल्ला की ग़ज़लों में सामाजिक परिस्थितियों और देश के प्रति गहरी चिंता झलकती है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सशक्त आवाज़ उठाई।
वहीं, हाजी फहीम सिद्दीकी (प्रांतीय अध्यक्ष, इंडियन नेशनल लीग) ने कहा कि मुल्ला की इंसानियत की अवधारणा किसी एक धर्म, दर्शन या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक रचनात्मक कलाकार की व्यापक दृष्टि का परिणाम है, जिसमें जीवन को निरंतर संघर्ष के रूप में देखा गया है।
संगोष्ठी में डॉ. सैयद मुहम्मद सबीह नदवी, डॉ. सीमा सिद्दीकी, ज़ियाउल्लाह सिद्दीकी, निकहत ज़हरा और डॉ. अरशद बयारवी ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि मुल्ला की विचारधारा, आत्मविश्वास और अपने दृष्टिकोण को निर्भीकता से प्रस्तुत करने की क्षमता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और शोध पत्र प्रस्तुतकर्ताओं के सम्मान में दावत का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की सफलता के लिए सभी सहयोगियों की सराहना की गई। अंत में सबीहा सुल्ताना एवं उनकी पुत्रियों शफ़क़ और शाखिकमा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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