TMC में बड़ा सियासी संकट, कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी जिन्होंने बढ़ाई ममता की मुश्किलें?
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों Ritabrata Banerjee का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी उठापटक के बीच पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी एक बड़े शक्ति केंद्र के रूप में उभरे हैं। दावा किया जा रहा है कि उनके नेतृत्व वाले गुट को विधानसभा में 58 विधायकों का समर्थन मिला है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि वह अब भी ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं और उन्हें पार्टी का मार्गदर्शक मानते हैं। इसके बावजूद TMC के भीतर बढ़ती खींचतान ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
छात्र राजनीति से राज्यसभा तक का सफर
Ritabrata Banerjee की राजनीतिक शुरुआत वामपंथी राजनीति से हुई थी। उन्हें दिवंगत वाम नेता सीताराम येचुरी का करीबी माना जाता है। छात्र संगठन SFI से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और महासचिव जैसे अहम पद तक पहुंचे।
कम उम्र में ही उन्हें राज्यसभा भेजा गया था, लेकिन वर्ष 2017 में अनुशासनहीनता के आरोपों के बाद उन्हें सीपीएम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।

बाद में पूर्व सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पूर्व सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
58 विधायकों के समर्थन से बदले समीकरण
राज्य विधानसभा में Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले गुट ने बड़ा दावा पेश किया है। बताया जा रहा है कि 58 विधायकों ने उनके समर्थन में हस्ताक्षर कर विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष रखा। इसके बाद उनके गुट ने नेता, उप-नेता और मुख्य सचेतक जैसे पदों की भी घोषणा कर दी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इतने विधायकों का समर्थन वास्तव में उनके साथ है, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई संख्या का आंकड़ा भी पार हो सकता है। मौजूदा विधानसभा में TMC के 80 विधायक हैं और किसी अलग गुट को वैधता बनाए रखने के लिए कम से कम 54 विधायकों का समर्थन चाहिए।
इसी वजह से Ritabrata Banerjee अब बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC के भीतर जारी यह सियासी संघर्ष किस दिशा में जाता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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