भारत को बड़ा झटका? रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ वाला बिल US सीनेट से आगे बढ़ा

India US Relations: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका में ऐसा विधेयक आगे बढ़ा है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी सीनेट (US Senate) ने रूस की तेल-गैस कमाई पर शिकंजा कसने वाले प्रतिबंध विधेयक पर चर्चा की मंजूरी दे दी है। यदि यह बिल दोनों सदनों से पारित होकर कानून बनता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाने का अधिकार मिल सकता है।

बिल को सीनेट में शुरुआती मंजूरी मिलने के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) भी सीनेट गैलरी में मौजूद थे। वॉशिंगटन दौरे के दौरान उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की और रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की।

क्या है बिल में खास?

सीनेट में बिल पर आगे चर्चा के पक्ष में 86 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 12 ने विरोध किया। यह सिर्फ पहली संसदीय मंजूरी है। अब इस पर विस्तृत बहस होगी और फिर अंतिम मतदान कराया जाएगा।

प्रस्तावित बिल में रूस के वरिष्ठ अधिकारियों, बड़े कारोबारियों, वित्तीय संस्थानों और उस तथाकथित “Shadow Fleet” पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल रूस कथित तौर पर तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।

सबसे अहम प्रावधान यह है कि कानून बनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन जैसे उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

बिल अभी कानून नहीं बना है, लेकिन यदि इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो भारत-अमेरिका व्यापार (India US Trade) संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा कि टैरिफ (Tariff) लगाया जाए या नहीं।

बिल के समर्थकों का कहना है कि रूस की ऊर्जा से होने वाली आय कम होने पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के लिए यूक्रेन युद्ध का वित्तीय बोझ उठाना मुश्किल होगा। यह युद्ध अब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है।

जेलेंस्की की मौजूदगी और आगे की प्रक्रिया

वोटिंग से पहले जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों से मुलाकात कर यूक्रेन के समर्थन और रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युद्ध लगातार तेज हो रहा है और शांति प्रयास अभी तक निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंचे हैं।

यह विधेयक दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसी ग्राहम (Lindsey Graham) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा फिलहाल अवकाश पर है, इसलिए सितंबर से पहले इस बिल पर वहां चर्चा होने की संभावना कम मानी जा रही है।

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