सोलह करोड़ की लागत से बना पुल 16 दिन में क्षतिग्रस्त, कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर हाल ही में बना नया पुल पहली ही बारिश में बदहाल हो गया। लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस पुल के शुरू होने के महज 16 दिनों के भीतर ही इसकी अप्रोच रोड धंस गई और सड़क पर विशालकाय गड्ढा बन गया। इस हादसे के बाद मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया है, जिससे स्कूली बच्चों और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस घटना ने उत्तराखंड सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मॉनसून की पहली बारिश भी झेल न पाने वाला यह ढांचा भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
प्रशासनिक सफाई और मरम्मत कार्य
नुकसान की खबरों के बीच देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पुल के मुख्य ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। उन्होंने कहा, हादसे के तुरंत बाद कंट्रोल रूम को अलर्ट कर अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं। पुल पूरी तरह सुरक्षित है, सिर्फ पहुँच मार्ग का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
देहरादून के नंदा की चौकी के पास बना नया पुल पहली बारिश में हुआ धराशाई… तकनीक का तो पता नहीं पर स्पेस पूरा दिखाई दे रहा है! pic.twitter.com/OajlZJbnzY
— Surabhi🇮🇳 (@surabhi_tiwari_) July 28, 2026
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन और सीबीआई जांच की मांग
दूसरी ओर, घटना के सामने आते ही सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता संग्राम सिंह पुंडीर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं टिक पाया, जो कि निर्माण एजेंसी की गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार को दर्शाता है। पार्टी ने माँग की है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराई जाए। पुंडीर ने लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज और क्षेत्रीय विधायकों को घेरते हुए कहा कि पहले के समय में ऐसे हादसों पर मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते थे, लेकिन मौजूदा सरकार चुप्पी साधे हुए है।
स्थानीय निवासियों ने भी जिलाधिकारी के बयान पर नाराजगी जाहिर की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन मामले को केवल कोने का नुकसान बताकर छोटा दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि धरातल पर मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार ठेकेदार और कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
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