बेंगलुरु में पूर्व हॉकी कप्तान के घर सेंधमारी, ओलंपिक गोल्ड समेत चार अंतरराष्ट्रीय पदक चोरी
Sports News: भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और तीन बार के ओलंपियन एमएम सोमैया के घर चोरी का मामला सामने आया है।
बेंगलुरु के न्यू थिप्पासंद्रा इलाके में स्थित उनके घर को निशाना बनाकर चोर ओलंपिक गोल्ड मेडल समेत कई कीमती सामान लेकर फरार हो गए।
चोरी हुए सामान में तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय पदक, सोने-चांदी के आभूषण और 30 हजार रुपये नकद भी शामिल हैं। कुल चोरी हुए सामान की कीमत करीब साढ़े तीन लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, यह घटना 28 अक्टूबर 2026 की रात की है। सोमैया ने बताया कि सुबह करीब 7:15 बजे उनके पड़ोसी ने घर का दरवाजा खुला देखा और उन्हें चोरी की आशंका की जानकारी दी।
इसके बाद पड़ोसी के घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई, जिसमें दो संदिग्ध रात करीब 2:34 बजे उनके घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसते दिखाई दिए।
घटना के समय सोमैया और उनका परिवार घर पर मौजूद नहीं था। वे 25 अक्टूबर की सुबह बेंगलुरु से कोडागु गए हुए थे। इसी दौरान चोरों ने घर में सेंध लगाकर कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया।
ओलंपिक गोल्ड समेत चार अंतरराष्ट्रीय पदक चोरी
चोरों ने एमएम सोमैया का 1980 मॉस्को ओलंपिक का गोल्ड मेडल भी चुरा लिया। इस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था।
इसके अलावा 1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स का सिल्वर मेडल, 1986 के सियोल एशियन गेम्स का ब्रॉन्ज मेडल और 1982 चैंपियंस ट्रॉफी का ब्रॉन्ज मेडल भी चोरी हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, चोरों ने पदकों के अलावा सोने के सिक्के, सोने का कंगन, चांदी के कप, चम्मच और अन्य बर्तन भी चुराए हैं।
चोरी हुए सामान में 72 ग्राम के दो सोने के सिक्के, आठ ग्राम का एक अन्य सिक्का, 10 ग्राम का सोने का कंगन, 144 ग्राम के चांदी के कप, 200 ग्राम की छह चांदी की चम्मच और 80 ग्राम का चांदी का बर्तन शामिल है। इसके साथ ही 30 हजार रुपये नकद भी गायब हैं।
मुख्यमंत्री से की पदक बरामद कराने की अपील
एमएम सोमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर मामले में मदद की अपील की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पुलिस अधिकारियों को मामले की गंभीरता से अवगत कराने और चोरी हुए पदकों सहित अन्य कीमती सामान बरामद करने के लिए जरूरी संसाधन लगाने का अनुरोध किया है।
सोमैया तीन बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने 1980, 1984 और 1988 के ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया था।
1988 के सियोल ओलंपिक में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान थे। खेल में उनके योगदान के लिए उन्हें 1985 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

