SC के आदेश पर भड़की CJP, अभिजीत दीपके का ऐलान! …फिर होगा छात्रों का बड़ा आंदोलन

Sandesh Wahak Digital Desk: देशभर में NEET आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ा संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद संगठन ने आशंका जताई है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मामलों में कार्रवाई तेज हो सकती है। CJP का कहना है कि अगर छात्रों को निशाना बनाया गया या पुलिस कार्रवाई जारी रही, तो संगठन दोबारा बड़े स्तर पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ कहा कि छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को टारगेट करना बंद करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो शांतिपूर्ण लेकिन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन फिर शुरू किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जताई चिंता

CJP नेता सौरव दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा पारित अंतरिम आदेश के निर्देश संख्या-4 को लेकर संगठन गंभीर चिंता में है। उनके मुताबिक इस निर्देश के चलते सरकारों को पहले से दर्ज FIR पर जांच आगे बढ़ाने की छूट मिल गई है, जिससे प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

उन्होंने दावा किया कि यह स्थिति 25 जुलाई 2026 को सरकार की ओर से दिए गए उस आश्वासन के विपरीत है, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और किसी भी छात्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परेशान न करने का भरोसा दिया गया था।

सौरव दास ने कहा कि इसी भरोसे के आधार पर CJP ने अपना आंदोलन वापस लिया था, लेकिन अब आशंका है कि कुछ राज्य सरकारें अदालत के आदेश का हवाला देकर छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को जारी रख सकती हैं।

सरकारी रुख पर उठाए सवाल

CJP ने अदालत में सरकार की ओर से रखे गए पक्ष पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि जब सरकार पहले ही प्रदर्शनकारियों को राहत देने का आश्वासन दे चुकी थी, तब अदालत में इस तथ्य को प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रखा गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि हजारों छात्रों से किए गए वादे को कानूनी प्रक्रिया की आड़ में कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। CJP का कहना है कि इससे युवाओं का भरोसा टूटेगा।

सौरव दास ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया है कि सरकार FIR वापस नहीं ले सकती। उनके मुताबिक बिहार और असम जैसे राज्यों ने पहले भी मामलों में राहत देने के कदम उठाए हैं, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें चाहें तो अब भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस ले सकती हैं।

सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें

CJP ने सरकार से ये मांग की है:

  • प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR तत्काल वापस ली जाएं।
  • युवाओं को भविष्य में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
  • 25 जुलाई को दिए गए आश्वासन की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखी जाए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

संगठन ने चेतावनी दी कि सरकार को वादे पूरे करने के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। अगर आश्वासनों को लागू नहीं किया गया और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही, तो देशभर में फिर से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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