El Nino Alert: जून-अगस्त नहीं, नवंबर तक धधकेगी धरती, 300 जिलों पर मंडराया खतरा

El Nino Effect in India: दुनियाभर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूरोप के कई देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है, जबकि भारत के कई हिस्सों में अब तक सामान्य बारिश नहीं हुई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब समेत कई राज्यों में मॉनसून की रफ्तार सुस्त है। इस बीच अल नीनो (El Nino) को लेकर आया नया अपडेट चिंता बढ़ाने वाला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर सिर्फ जून-अगस्त तक नहीं, बल्कि नवंबर तक बना रह सकता है, जिससे गर्मी और कमजोर मॉनसून का खतरा और गहरा सकता है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक जून से अगस्त के बीच El Nino बनने की संभावना 80 फीसदी है, जबकि इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना 90 फीसदी से अधिक है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चेतावनी दी है कि अल नीनो पहले से गर्म हो रही दुनिया में “आग में घी” का काम करेगा और इसके असर पहले से ज्यादा व्यापक हो सकते हैं।

भारत के 300 जिलों पर असर की आशंका

पहले अनुमान था कि देश के 111 जिले अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन अब यह दायरा बढ़कर करीब 300 जिलों तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। कृषि मंत्रालय और आईसीएआर (ICAR) के आकलन के अनुसार 315 जिलों में कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा समेत 12 राज्यों के जिले शामिल हैं।

भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 1 से 27 जून के बीच देश में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। आमतौर पर इस अवधि में 141.8 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 80.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर खरीफ फसलों और वर्षा आधारित खेती पर पड़ सकता है।

सरकार ने राज्यों को किया अलर्ट

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संभावित प्रभावित जिलों की पहचान कर राज्यों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है। सरकार ने जल संरक्षण, तालाबों, जलाशयों, चेक डैम और खेत-तालाबों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश की स्थिति में भी पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। साथ ही संवेदनशील इलाकों में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर दूसरे क्षेत्रों से पानी पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।

सरकार ने पशुपालकों की चिंताओं को देखते हुए चारे के संभावित संकट से निपटने की भी योजना बनाई है। जिन राज्यों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां से प्रभावित इलाकों तक सप्लाई की तैयारी की जा रही है, ताकि मॉनसून कमजोर रहने की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को राहत मिल सके।

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