दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में बड़ा एक्शन, सत्येंद्र जैन समेत 6 गिरफ्तार, 1.52 करोड़ रिश्वत का आरोप
Delhi Jal Board Scam: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और तीन निजी व्यक्ति शामिल हैं। यह मामला STP के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
पूर्व CEO पर ₹1.52 करोड़ लेने का आरोप
ACB की जांच में तत्कालीन DJB CEO उदित प्रकाश राय पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, राय और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में कुल ₹1.52 करोड़ की रकम पहुंची। यह रकम नागेंद्र यादव की कंपनी AN Enterprises के जरिए बैंकिंग चैनल से भेजे जाने का आरोप है।
बाद की ED जांच में भी इस ₹1.52 करोड़ के लेनदेन का जिक्र सामने आया था। जुलाई 2025 में सामने आई जांच जानकारी के मुताबिक, एजेंसी ने कहा था कि राय और उनकी सास के खातों तक रकम पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर लेनदेन किया गया। ED ने ऐसे लेनदेन की कुल रकम करीब ₹5 करोड़ तक होने का भी दावा किया था।
₹1,546 करोड़ से बढ़कर ₹1,943 करोड़ हुआ था टेंडर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) के 10 STP के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए चार टेंडर जारी किए गए थे। इनकी शुरुआती अनुमानित लागत करीब ₹1,546 करोड़ थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹1,943 करोड़ कर दिया गया।
ED की जांच में आरोप लगाया गया कि टेंडर की शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि एक खास तकनीक और उससे जुड़ी कंपनी को फायदा मिल सके। एजेंसी के मुताबिक, चारों टेंडरों में केवल तीन ज्वाइंट वेंचर कंपनियों ने हिस्सा लिया और बाद में काम एक निजी कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट किया गया।
इस मामले में ACB ने 11 मई 2024 को FIR दर्ज की थी। इसके बाद ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। दिसंबर 2025 में ED ने सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) समेत 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और करीब ₹17.70 करोड़ के कथित अपराध से जुड़े धन (Proceeds of Crime) का उल्लेख किया था।
हालांकि, गिरफ्तारी और जांच एजेंसियों के आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
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