फर्जी आदेश से लखनऊ में 2000 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश, जांच के घेरे में 10 अफसर
Lucknow News: लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में करीब 2 हजार करोड़ रुपये कीमत की सरकारी जमीन को हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। छह गांवों में चारागाह, बंजर और दूसरी सुरक्षित सरकारी जमीनों से जुड़े इस मामले में चकबंदी विभाग के पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। जिलाधिकारी की जांच के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए 10 पूर्व अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
मामला 1988 से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि भूमाफिया ने चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी आदेश तैयार कराए और सरकारी जमीन पर कब्जा किया। बाद में जमीन का एक हिस्सा बेचने का भी आरोप है।
हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
वर्ष 2020 में जमीनों को खतौनी में दर्ज कराने के लिए मामला हाईकोर्ट पहुंचा। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कोर्ट को गड़बड़ी का संदेह हुआ। इसके बाद 2021 में लखनऊ के तत्कालीन जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। जांच आगे बढ़ी, लेकिन बाद में मामला लंबित हो गया।
23 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान जांच में देरी का मुद्दा उठा। इसके बाद रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को भेजी गई और 5 अगस्त 2026 को जांच रिपोर्ट सामने आई।
चार लोगों पर FIR, अफसरों की भी होगी जांच
रिपोर्ट के आधार पर रामेंद्र कुमार, अमित कुमार, सुनील कुमार और लईक खां के खिलाफ जानकीपुरम थाने में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनंद ने बताया कि दस्तावेजों की जांच चल रही है। 1988 से अब तक तैनात रहे चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्योरा भी मांगा गया है। उनके बयान दर्ज किए जाएंगे और साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

