मानसून में हर बुखार एक जैसा नहीं, जानिए वायरल, डेंगू, टाइफाइड और बैक्टीरियल फीवर का फर्क
Viral Fever: देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। इस मौसम में जलभराव, नमी और संक्रमण बढ़ने के कारण बुखार के मरीज भी तेजी से बढ़ते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर बुखार का कारण एक जैसा नहीं होता, लेकिन कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या ओटीसी दवाएं लेना शुरू कर देते हैं।
ग्लेनीगल्स फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी गलती से सही इलाज मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए वायरल, बैक्टीरियल, डेंगू और टाइफाइड के बुखार के लक्षणों को पहचानना जरूरी है।
किस बुखार में क्या होते हैं लक्षण?
वायरल फीवर आमतौर पर अचानक शुरू होता है और 3 से 7 दिन तक रहता है। इसमें हल्का या मध्यम बुखार, खांसी, जुकाम, गले में दर्द, बदन दर्द और थकान होती है। इसका इलाज आराम, पर्याप्त पानी और पैरासिटामोल से किया जाता है। इसमें एंटीबायोटिक असर नहीं करती।
बैक्टीरियल फीवर धीरे-धीरे बढ़ता है और इलाज न मिलने पर गंभीर हो सकता है। इसमें गले में तेज दर्द, पेशाब में जलन, तेज बुखार या संक्रमण वाली जगह पर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसका इलाज डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक से किया जाता है।
डेंगू मच्छर के काटने से फैलता है। इसमें 103 से 105 डिग्री तक तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, लाल चकत्ते और उल्टी की शिकायत हो सकती है। बुखार उतरने के बाद प्लेटलेट्स गिरने का खतरा रहता है, इसलिए नियमित जांच जरूरी होती है।

टाइफाइड में न करें लापरवाही
टाइफाइड दूषित भोजन और पानी से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है। इसमें बुखार धीरे-धीरे बढ़ता है और लंबे समय तक रह सकता है। पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, कब्ज या दस्त और कुछ मरीजों में गुलाबी रंग के धब्बे इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसका इलाज एंटीबायोटिक के पूरे कोर्स और डॉक्टर की निगरानी में किया जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि 103 डिग्री या उससे अधिक बुखार तीन दिन से ज्यादा रहे या सांस लेने में तकलीफ, लगातार उल्टी, तेज कमजोरी या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खुद से दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
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