रोजाना इंसुलिन से मिलेगी राहत, भारत में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला साप्ताहिक इंसुलिन

Weekly Insulin in India : डायबिटीज के मरीजों के लिए इंसुलिन का मतलब अब तक रोजाना इंजेक्शन लगाना रहा है। लेकिन अब यह तरीका बदलने जा रहा है। नोवो नॉर्डिस्क ने 9 जुलाई को भारत में Awiqli (इंसुलिन इकोडेक) लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह दुनिया का पहला ऐसा बेसल इंसुलिन है जिसे क्लीनिकल इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है और जिसे सप्ताह में सिर्फ एक बार लेना होगा।

इस नई थेरेपी के साथ मरीजों को सालभर में 365 इंजेक्शन की जगह केवल 52 इंजेक्शन लगाने होंगे। कंपनी का कहना है कि इससे इंसुलिन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

भारत में क्यों अहम है यह लॉन्च?

कंपनी के मुताबिक, भारत इस दवा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है। ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, देश में 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोगों को प्री-डायबिटीज है।

काफी समय से डॉक्टर यह बताते रहे हैं कि जिन मरीजों को इंसुलिन की जरूरत होती है, उनमें से कई लोग रोजाना इंजेक्शन लगाने के डर या मानसिक दबाव के कारण इलाज शुरू नहीं करते या बीच में छोड़ देते हैं।

नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोट्रिया ने कहा कि कंपनी का मानना है कि Awiqli इंसुलिन शुरू करने में आने वाली मानसिक और शारीरिक बाधाओं को कम करने में मदद करेगा। उनके अनुसार, कई मरीजों के लिए समस्या सिर्फ सुई का डर नहीं होती, बल्कि रोजाना इंसुलिन लेने की मजबूरी भी होती है।

क्लीनिकल ट्रायल में क्या सामने आया?

कंपनी ने बताया कि Awiqli को वैश्विक ONWARDS फेज-3 क्लीनिकल प्रोग्राम का समर्थन मिला है, जिसमें दुनिया भर के 4,000 से अधिक वयस्क शामिल थे। इनमें भारत के प्रतिभागी भी शामिल थे।

कंपनी के अनुसार, अध्ययन में यह पाया गया कि सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले इस इंसुलिन से HbA1c में अधिक कमी दर्ज हुई। इसके साथ ही मरीजों का ब्लड शुगर लंबे समय तक सामान्य सीमा में बना रहा। सुरक्षा के मामले में भी इसका प्रदर्शन रोजाना दिए जाने वाले इंसुलिन ग्लार्जिन U100 के बराबर रहा।

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के अपोलो सेंटर फॉर ओबेसिटी, डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी के वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. वांगनू ने कहा कि इंसुलिन कई मरीजों के इलाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इलाज शुरू करने में देरी और दवा नियमित न लेने की समस्या अब भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी नई तकनीकें, जो इलाज को आसान बनाती हैं, मरीजों के व्यवहार में बदलाव ला सकती हैं और डॉक्टरों के लिए समय पर इलाज शुरू कराने में मददगार हो सकती हैं।

कीमत और बाजार में स्थिति

भारत में Awiqli की कीमत 261 रुपये प्रति सप्ताह तय की गई है। कंपनी के अनुसार, यह दवा बाजार में पहले से मौजूद बेसल इंसुलिन ब्रांड्स जैसे सैनोफी के Lantus और अन्य इंसुलिन ग्लार्जिन उत्पादों के मुकाबले उपलब्ध होगी।

भारत इस थेरेपी को मंजूरी देने वाला दुनिया का सातवां बाजार बन गया है। इससे पहले इसे अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों में मंजूरी मिल चुकी है।

कंपनी के अनुसार, IMARC का अनुमान है कि भारत का इंसुलिन बाजार 2025 में 660.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2034 तक 916.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके पीछे बढ़ते डायबिटीज के मामले, निष्क्रिय जीवनशैली, खराब खानपान और भारतीयों में आनुवंशिक कारण प्रमुख वजह माने गए हैं।

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