Ram Mandir: दानपात्रों से उठा श्रद्धालुओं का भरोसा, नकद चढ़ावा 50% तक घटा, रसीद वाले दान में बढ़ोतरी

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण का असर अब श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दर्शनार्थियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन दानपात्रों में नकद चढ़ावा देने के बजाय श्रद्धालु अब रसीद कटवाकर या ऑनलाइन माध्यम से दान करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इसका सीधा असर मंदिर के दानपात्रों में जमा होने वाली राशि पर पड़ा है, जिसमें पिछले कुछ दिनों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

बैंक सूत्रों के अनुसार, जून महीने में मंदिर के दानपात्रों से प्रतिदिन औसतन 20 से 24 लाख रुपये जमा हो रहे थे। वहीं जुलाई में यह आंकड़ा लगातार घटते हुए 10 लाख रुपये से भी नीचे पहुंच गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 5 जुलाई को करीब 14 लाख रुपये जमा हुए थे, जो 10 जुलाई तक घटकर लगभग 9.15 लाख रुपये रह गए।

दान का तरीका बदला, नकद चढ़ावे में आई गिरावट

झांसी से Ayodhya Ram Mandir दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु गुलाब सिंह दांगी ने बताया कि करीब दो घंटे मंदिर परिसर में रहने के दौरान उन्होंने किसी श्रद्धालु को दानपात्र में बड़ी राशि डालते नहीं देखा। उनके मुताबिक अधिकांश लोग दान काउंटर से रसीद कटवाकर दान कर रहे थे, जबकि कई श्रद्धालु ऑनलाइन भुगतान का विकल्प चुन रहे थे।

उनके साथ आए वीरू दांगी और नीरज दांगी ने भी यही दावा किया। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में रखे कई दानपात्र लगभग खाली नजर आए और श्रद्धालुओं के बीच पारदर्शिता को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी वजह से उन्होंने भी रसीद लेकर दान करना उचित समझा।

मंदिर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं का भरोसा दानपात्रों की बजाय रसीद आधारित और डिजिटल दान पर बढ़ा है। एक दान काउंटर संचालक ने भी बताया कि अब अधिकांश श्रद्धालु दानपात्र में बड़ी रकम डालने के बजाय 10, 20 और 50 रुपये के छोटे नोट ही अर्पित कर रहे हैं।

5 से 10 जुलाई तक दानपात्रों में जमा राशि

  • 5 जुलाई: ₹14 लाख
  • 6 जुलाई: ₹13.20 लाख
  • 7 जुलाई: ₹12 लाख
  • 8 जुलाई: ₹11 लाख
  • 9 जुलाई: ₹10.25 लाख
  • 10 जुलाई: ₹9.15 लाख

Ram Mandir Trust में होंगे बड़े बदलाव

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी संगठनात्मक बदलाव की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. कृष्ण मोहन 22 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव का कार्यभार संभाल सकते हैं। 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में उन्हें अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे।

22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में नई टीम का औपचारिक ऐलान होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों पर भी नए सदस्यों की नियुक्ति लगभग तय हो चुकी है। अयोध्या राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र का नाम भी संभावित सदस्यों में चर्चा में है, हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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