गाजियाबाद में वाइटनर-केमिकल से बन रहा था पनीर, 3 फैक्ट्रियों से 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया नष्ट
Fake Paneer in Ghaziabad: सस्ता पनीर देखकर अगर आप इसे बचत का सौदा समझकर खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में पनीर के नाम पर चल रहे मिलावट के बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
भोजपुर थाना क्षेत्र के नाहली गांव में तीन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के दौरान आरोप है कि पनीर को सफेद और वजनदार बनाने के लिए वाइटनर, पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और दूसरे केमिकल इस्तेमाल किए जा रहे थे।
खाद्य विभाग ने मौके से 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया नष्ट कराया। इसके अलावा अलग-अलग सामग्री और केमिकल के 20 नमूने जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे गए हैं।
त्योहारों में रोज 300-400 किलो तक सप्लाई
सहायक आयुक्त खाद्य-2 सुरेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, फैक्टरी संचालकों कलवा, सकील और कफील के खिलाफ भोजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपियों पर बीएनएस की धारा 123 और 275 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि फैक्ट्रियों में पनीर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल आरोपी खुद तैयार कर रहे थे। इनका इस्तेमाल करने के बाद तैयार पनीर को सामान्य घरेलू तरीकों से पहचानना भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वह दिखने और स्वाद में असली जैसा लगता है।
पूछताछ में सामने आया कि त्योहारों के दौरान तीनों फैक्ट्रियों से रोजाना करीब 300 से 400 किलो नकली पनीर (Fake Panner) तैयार कर बाजार में भेजा जा रहा था। इसकी सप्लाई गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ तक होने की बात सामने आई है। बाजार में यह पनीर करीब 200 से 250 रुपये किलो में बिक रहा था।
सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर
विशेषज्ञों के मुताबिक औद्योगिक रसायनों वाले मिलावटी खाद्य पदार्थ शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से तंत्रिका तंत्र, लिवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ने का खतरा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि पनीर और डेयरी उत्पाद लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदें। त्योहारों को देखते हुए जिले में मिठाई और डेयरी उत्पादों की जांच का अभियान भी तेज किया जाएगा।
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