RBI MPC 2026: ब्याज दरों पर RBI का बड़ा फैसला, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

RBI MPC Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC Meeting 2026) के नतीजे घोषित करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों को राहत मिली है, क्योंकि उनकी EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों ने आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम है।

वैश्विक हालात पर RBI की नजर

मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया के कई बड़े केंद्रीय बैंक महंगाई के दबाव और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए ब्याज दरों में सख्ती का रास्ता अपना सकते हैं। ऐसे माहौल में भारत को भी सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जोखिम बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिल रही है।

शेयर बाजार में तेजी, बॉन्ड बाजार में चिंता

आरबीआई गवर्नर के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती उम्मीदों की वजह से शेयर बाजारों में उत्साह बना हुआ है। हालांकि दूसरी ओर महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताओं के कारण बॉन्ड बाजार में दबाव देखा जा रहा है। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।

2025 में मिली थी राहत

RBI MPC 2026: ब्याज दरों पर RBI का बड़ा फैसला, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आरबीआई ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर आम लोगों को बड़ी राहत दी थी। हालांकि 2026 में बदलते वैश्विक हालात और महंगाई संबंधी चिंताओं के चलते केंद्रीय बैंक ने फरवरी, अप्रैल और अब जून की बैठक में भी रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल RBI विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में आने वाली बैठकों में भी वैश्विक परिस्थितियां ब्याज दरों के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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