IPC की धाराओं पर High Court की बड़ी टिप्पणी, कहा- एक साथ नहीं लग सकती धारा 420 और 409

Prayagraj News: इलाहाबाद High Court ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े अपराधों की प्रकृति अलग होती है, इसलिए धारा 420 और धारा 406 को एक ही मामले में एक साथ लागू नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने मेरठ के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक मामले में यह टिप्पणी करते हुए निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान और जारी समन आदेश को रद्द कर दिया।

High Court ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान याची पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम ने दलील दी कि एफआईआर में लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और मामला मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित दिल्ली रेस क्लब मामले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी (Cheating) और आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) दोनों अलग-अलग प्रकृति के अपराध हैं और इनके आवश्यक तत्व भी अलग हैं।

कोर्ट के अनुसार धोखाधड़ी के मामले में यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की आपराधिक मंशा शुरुआत से ही मौजूद थी और उसने किसी व्यक्ति को भ्रमित या गुमराह करके संपत्ति या लाभ हासिल किया। जबकि आपराधिक विश्वासघात के मामले में संपत्ति या वस्तु पहले भरोसे के आधार पर सौंपी जाती है और बाद में उसका दुरुपयोग किया जाता है।

मेरठ मामले में मिली राहत

High Court ने कहा कि जब दोनों अपराधों की बुनियादी प्रकृति अलग है, तो सामान्य परिस्थितियों में दोनों धाराओं को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने मेरठ के अभिषेक गौतम से जुड़े मामले में निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान और जारी समन आदेश को रद्द कर दिया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि High Court का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है, जहां जांच एजेंसियां या शिकायतकर्ता एक ही घटना में दोनों धाराओं का इस्तेमाल करते हैं।

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