लखीमपुर हिंसा केस में टेनी-आशीष मिश्रा को राहत, UP पुलिस की रिपोर्ट से बदला केस का रुख
Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ और उनके बेटे आशीष मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि जांच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों का गवाह को धमकाने या झूठी गवाही के लिए दबाव बनाने में कोई हाथ था।
यह मामला 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के चश्मदीद गवाह बलजिंदर सिंह को कथित तौर पर धमकाने से जुड़ा है। बलजिंदर ने आरोप लगाया था कि उन्हें गवाही से रोकने और बयान बदलने के लिए धमकाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली यूपी पुलिस?
16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में यूपी पुलिस ने बताया कि जांच में अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पुलिस ने कहा कि इस मामले में पर्याप्त सबूत केवल सह-आरोपी अमनदीप सिंह के खिलाफ मिले हैं।
इसी आधार पर अमनदीप सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 195A (गवाह को धमकाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है।
क्या है पूरा मामला?
3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें चार किसान, एक पत्रकार, दो भाजपा कार्यकर्ता और एक वाहन चालक शामिल थे। किसानों को एसयूवी से कुचलने के मामले में आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं और इस केस की सुनवाई अभी स्थानीय अदालत में चल रही है।
चश्मदीद गवाह बलजिंदर सिंह का आरोप था कि अगस्त 2023 में अमनदीप सिंह उनके घर और ससुराल पहुंचा था। उसने कथित तौर पर गवाही न देने का दबाव बनाया, धमकी दी और एक लाख रुपये देने की कोशिश की। बलजिंदर ने यह भी दावा किया था कि अमनदीप यह सब अजय मिश्रा के कहने पर कर रहा था। हालांकि जांच में पुलिस को टेनी और आशीष मिश्रा की संलिप्तता के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
Also Read: DM की जांच में खुली लखनऊ नगर निगम की पोल, 36 IGRS शिकायतों का गलत निस्तारण आया सामने

