यूनिवर्सल वननेस महासम्मेलन में 30 देशों के धर्मगुरुओं ने नफरत के खिलाफ मिलाया हाथ

Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस (एक विश्व, एक मानवता) शिखर सम्मेलन में दुनिया के 30 देशों से आए 200 से अधिक धार्मिक नेताओं और प्रतिनिधियों ने नफरत, हिंसा और अविश्वास के खिलाफ एक सुर में आवाज उठाई। इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए और संगठन की ओर से इस वैश्विक शांति अभियान को पूरा समर्थन देने की बात कही।

कार्यक्रम के अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में सभी धर्मगुरुओं ने एकमत होकर कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य समाज को जोड़ना और आपसी मतभेदों को मिटाना है, न कि हिंसा या वैमनस्य को बढ़ावा देना।

घोषणापत्र के मुख्य बिंदु

पहचान बनाए रखते हुए एकता: घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया कि एकता का मतलब अपनी विशिष्ट पहचान खोना नहीं है। व्यक्ति अपनी आस्था पर अडिग रहते हुए भी दूसरों के विचारों और विश्वास का सम्मान कर सकता है।

समुदायों की जिम्मेदारी: धर्मगुरुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने समुदायों में दी जा रही शिक्षाओं की समीक्षा करेंगे और युवाओं को सीमाओं से परे जोड़कर संवाद स्थापित करेंगे, ताकि विवादों की नौबत ही न आए।

तकनीक और AI का सही इस्तेमाल: डिजिटल माध्यमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से फैल रही नफरत पर चिंता जताते हुए यह मांग की गई कि तकनीक का प्रयोग मानवीय गरिमा, सत्य और लोक कल्याण के लिए होना चाहिए।

भाईचारे का प्रतीक रक्षासूत्र: सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर आपसी सुरक्षा, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

संघ प्रमुख मोहन भागवत का संदेश

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, विविधता प्रकृति का स्वभाव है और आंतरिक एकता ही परम सत्य है। उन्होंने कहा कि सभी धर्म एक ही ईश्वर तक पहुंचने के अलग-अलग मार्ग हैं। मुस्लिम समाज और हिंदू राष्ट्र की सोच पर अपनी बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भारत को मुस्लिम-मुक्त देखना चाहता है, तो वह सच्चा हिंदू नहीं हो सकता। सच्चा हिंदू वही है जो हर इंसान की गरिमा और सभी उपासना पद्धतियों का सम्मान करता है।

उन्होंने जानकारी दी कि भारत में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ संवाद की प्रक्रिया लगातार जारी है। भागवत ने जोर देकर कहा कि विश्व शांति और अविश्वास का समाधान राजनीति से नहीं, बल्कि समाज के निस्वार्थ प्रयासों और स्थानीय स्तर पर अंतर-धार्मिक संवाद से ही संभव है।

Also Read: नेपाल बाढ़ का कहर: 6 हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में 850 से ज्यादा लोग फंसे, सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Get real time updates directly on you device, subscribe now.