देश में बैन और मैसेज एडिटिंग रोकने के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा टेलीग्राम

Sandesh Wahak Digital Desk: दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक टेलीग्राम (Telegram) और भारत सरकार के बीच का विवाद अब देश की दहलीज लांघकर दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा भारत में टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने और कुछ खास फीचर्स को निष्क्रिय करने के सख्त आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी ने एक रिट याचिका दायर की है। राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, साइबर फ्रॉड और देश के करोड़ों उपभोक्ताओं की निजता व हितों से जुड़ा होने के कारण इस कानूनी लड़ाई को बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टेलीग्राम द्वारा अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69ए के तहत 16 जून को एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस सरकारी आदेश में मुख्य रूप से दो बड़ी बातें कही गई हैं। 22 जून, 2026 तक देश के सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और मोबाइल ऐप स्टोर्स को भारत में टेलीग्राम की पहुंच और सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करना होगा। 30 जून, 2026 तक टेलीग्राम के सबसे लोकप्रिय मैसेज एडिटिंग फीचर (संदेशों को संशोधित करने की सुविधा) को पूरी तरह से बंद या निष्क्रिय रखना होगा।

15 करोड़ भारतीय यूजर्स का हवाला

अदालत में टेलीग्राम ने दलील दी है कि सरकार का यह एकतरफा फैसला बेहद कठोर और अनुपातहीन है। कंपनी के मुताबिक, भारत उसका दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, जहां उसके 15 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। इनमें लाखों छात्र, शिक्षक, प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान, छोटे-बड़े कारोबारी, मीडिया संस्थान और आम नागरिक शामिल हैं, जो दैनिक संवाद और पठन-सामग्री के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। अचानक पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने से देश की एक बड़ी आबादी प्रभावित होगी।

साइबर अपराधों का गढ़ बनने का आरोप

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों का पक्ष बेहद सख्त है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-2026 से जुड़े कथित पेपर लीक की सामग्रियां, सॉल्वर गैंग के इनपुट और अन्य आपत्तिजनक कंटेंट टेलीग्राम के विभिन्न चैनलों और गुप्त समूहों के माध्यम से धड़ल्ले से प्रसारित किए जा रहे थे।

सरकार ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में टेलीग्राम को साइबर ठगी, सरकारी और निजी डेटा लीक, वित्तीय अपराध, बाल यौन शोषण सामग्री, कट्टरपंथी प्रचार और संगठित साइबर अपराधों का एक प्रमुख जरिया बताया है। सरकार का तर्क है कि देश की सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की शुचिता को बनाए रखने के लिए ऐसी त्वरित और सख्त कार्रवाई अपरिहार्य थी।

सुनवाई का नहीं मिला मौका: टेलीग्राम

प्रतिबंध के आदेश के खिलाफ काउंटर करते हुए टेलीग्राम ने अदालत को बताया कि वह भारतीय कानून और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार सहयोग कर रहा है। कंपनी का दावा है कि 9 जून को सरकार से पहली शिकायत मिलने के महज एक घंटे के भीतर अधिकांश संदिग्ध लिंक्स को हटा दिया गया था। अब तक नीट परीक्षा से जुड़े 900 से अधिक संदिग्ध चैनलों और उनकी सामग्रियों को ब्लॉक किया जा चुका है।

कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और एक विशेष मॉडरेशन टीम के जरिए इस पर लगातार नजर रख रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर सरकार को कुछ चुनिंदा चैनलों या ग्रुप्स से आपत्ति थी, तो केवल उन्हें ब्लॉक करने का विकल्प मौजूद था, पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अनुचित है। साथ ही आरोप लगाया गया कि आदेश जारी करने से पहले टेलीग्राम को अपना पक्ष रखने के लिए प्रभावी सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया।

भविष्य के डिजिटल नियमों पर पड़ेगा इस केस का असर

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ इस पूरे मामले पर जो भी रुख अपनाएगी, उसका असर सिर्फ टेलीग्राम तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत में काम कर रहे अन्य बड़े सोशल मीडिया और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे व्हाट्सएप, सिग्नल आदि) के लिए भी नए कानूनी मानक तय होंगे। यही वजह है कि टेक जगत और डिजिटल राइट्स से जुड़े जानकारों की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हैं।

रिपोर्ट- चेतन गुप्ता

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