GST घोटाले में घिरे पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा, ED ने दिल्ली-NCR और पंजाब के कई ठिकानों पर की छापेमारी

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग और करीब 100 करोड़ रुपये की कथित जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी की टीमों ने संजीव अरोड़ा की कंपनी ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी’ से जुड़े ठिकानों पर पंजाब के लुधियाना, जालंधर सहित दिल्ली और नोएडा (एनसीआर) में एक साथ छापेमारी की। इस बड़ी कार्रवाई से राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मंत्री संजीव अरोड़ा के अलावा ईडी ने जालंधर में नगर निगम के जाने-माने कांट्रैक्टर अमित बजाज के ठिकानों पर भी दबिश दी है। अमित बजाज और उनके बड़े भाई इंदरजीत बजाज का पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों के सरकारी विभागों में बड़ा नेटवर्क है और वे बड़े स्तर पर ठेकेदारी का काम संभालते हैं। गौरतलब है कि उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को पिछले महीने ईडी द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में हैं। अरोड़ा ने अपनी इस गिरफ्तारी को ‘मनमाना और असंवैधानिक’ बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।

केजरीवाल ने बताया राजनीतिक साजिश

इस छापेमारी पर आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा, आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ईडी की रेड हुई है। केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को डरा रही है ताकि उन पर राजनीतिक दबाव बनाकर उन्हें अपने पाले में लाया जा सके, लेकिन पंजाबी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” केजरीवाल ने व्यापारियों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। उन्होंने हिंदू व्यापारियों को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।

2024 से जारी है जांच का सिलसिला, कंपनी ने दी सफाई

संजीव अरोड़ा पर जांच का यह शिकंजा नया नहीं है। इससे पहले साल 2024 में भी, जब वे राज्यसभा सांसद थे, तब एक औद्योगिक भूमि को आवासीय प्रोजेक्ट में बदलने के मामले में उन पर ईडी की रेड हुई थी। इस साल 9 मई को उन्हें पीएमएलए एक्ट के तहत चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया था।

दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा की कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने मई 2023 में ‘मेक इन इंडिया’ और पीएलआई (PLI) स्कीम के तहत मोबाइल एक्सपोर्ट का काम शुरू किया था। कंपनी ने फर्जी एक्सपोर्ट या राउंड ट्रिपिंग के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि वे खुद सप्लायर की तरफ से की गई धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।

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