KGMU धर्मांतरण केस की आंच अब PGI तक, व्हाट्सऐप पर बनता था प्लान, हॉस्टल में बुलाए जाते थे मौलाना
KGMU Conversion Case: लखनऊ (Lucknow) के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में धर्मांतरण के आरोपों की जांच का दायरा अब संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) तक पहुंच गया है। जांच में सामने आया है कि डॉक्टरों, मौलानाओं और मेडिकल स्टाफ के बीच WhatsApp ग्रुप के जरिए संपर्क रखा जाता था। आरोप है कि इसी ग्रुप पर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने और धर्मांतरण से जुड़ी योजनाओं को लेकर बातचीत होती थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा, देवबंद और बरेली समेत कई जगहों से मौलानाओं को मिलने के बहाने हॉस्टल बुलाया जाता था। वहां तकरीर के बाद मुस्लिम डॉक्टरों, जूनियर रेजिडेंट (JR) और मेडिकल स्टाफ के साथ बैठकें होती थीं। STF की जांच और पीड़ितों के बयानों में इन गतिविधियों से जुड़े कई बिंदु सामने आए हैं।
WhatsApp ग्रुप में डॉक्टरों और मौलानाओं के जुड़े होने का दावा
धर्मांतरण के आरोप (KGMU Conversion Case) में जेल में बंद डॉ. रमीज ने कथित तौर पर इस ग्रुप में आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) से जुड़े मुनेश खान, मोहम्मद कैफ और डॉ. सैम अनीस के अलावा KGMU के मोहम्मद जहीर, मोहम्मद अमान, मोहम्मद अयान समेत कई लोगों को जोड़ा था। ग्रुप में KGMU की डॉ. सुमायरा कयूम, डॉ. वाहिद अली और एसएस अब्बास के नाम भी बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रुप में महिला डॉक्टरों के साथ व्यवहार, उनकी छुट्टियों की मंजूरी और किसी मुस्लिम डॉक्टर या कर्मचारी के मुश्किल में फंसने पर उसे बचाने जैसे मुद्दों पर भी निर्देश दिए जाते थे।
FaceTime और Dark Web के इस्तेमाल की जांच
आरोप है कि कॉल ट्रेस होने से बचने के लिए डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ सामान्य फोन कॉल के बजाय FaceTime और WhatsApp कॉल का इस्तेमाल करते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मामले के खुलासे के बाद कुछ लोग ग्रुप छोड़ रहे हैं और एक-दूसरे से दूरी बना रहे हैं। STF ने रमीज के करीबियों का डेटा जुटाया है। कॉल डिटेल के आधार पर उनसे पूछताछ की तैयारी है। जरूरत पड़ने पर मोबाइल फोन जब्त कर डेटा रिकवर कराया जा सकता है।
जांच में डार्क वेब (Dark Web) के जरिए देशभर में नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में रहने का आरोप भी सामने आया है। STF ने डॉ. रमीज का लैपटॉप कब्जे में लेकर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। दिसंबर 2025 में एक महिला डॉक्टर की शिकायत के बाद मामला STF को सौंपा गया था।
अब SGPGI के हिंदू मेडिकल स्टाफ और जूनियर रेजिडेंट के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच एजेंसी बयानों और साक्ष्यों के आधार पर वहां के डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल करेगी।

