टोरंटो में बोले मोहन भागवत, वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए दुनिया को तीसरे रास्ते की जरूरत
Sandesh Wahak Digital Desk: कनाडा के टोरंटो क्षेत्र में आयोजित एक सभा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। 2,000 से अधिक लोगों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आपसी संघर्षों, पर्यावरण संकट और व्यक्तिगत व सामाजिक हितों के टकराव से जूझ रही है।
राष्ट्रीय विकास दूसरे देशों के लिए न बने मुसीबत
मानव जाति ने भले ही विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की हो, लेकिन इस ज्ञान का पहला प्रयोग अक्सर विनाशकारी कार्यों के लिए हुआ है। आरएसएस प्रमुख ने परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए कहा कि हमने स्वच्छ ऊर्जा से पहले परमाणु हथियारों को प्राथमिकता दी, जो कि एक बड़ी विडंबना है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी देश की प्रगति अगर दूसरों को नुकसान पहुंचाकर हासिल की जाती है, तो वह स्थायी नहीं हो सकती।
व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाएगा प्राचीन भारतीय विचार
मौजूदा वैश्विक मॉडल अक्सर व्यक्ति की व्यक्तिगत खुशी और समाज के कल्याण को एक-दूसरे के विपरीत खड़ा कर देते हैं। इस टकराव को दूर करने के लिए मोहन भागवत ने भारत के प्राचीन ‘तीसरे मार्ग’ को अपनाने पर जोर दिया। यह एक ऐसा संतुलन है जहाँ व्यक्ति, समाज और प्रकृति तीनों एक-दूसरे को बिना क्षति पहुँचाए साथ-साथ प्रगति कर सकते हैं।
वैचारिक मतभेदों को भुलाकर आत्म-मंथन और एकजुटता पर जोर
उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों को विवाद या प्रतिस्पर्धा का कारण बनाने के बजाय आत्म-मंथन का जरिया बनाना चाहिए। विभिन्नताओं, अलग-अलग विचारों और स्वभाव के बावजूद साथ रहने का संकल्प लेकर ही एक बेहतर और शांतिपूर्ण दुनिया का निर्माण किया जा सकता है।
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