ट्रंप का नया दांव, भारत समेत 60 देशों पर लगेगा 12.5% अतिरिक्त टैरिफ
Sandesh Wahak Digital Desk: एक तरफ भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत अपने अंतिम दौर में है, दूसरी तरफ अमेरिका ने भारत को एक बड़ा झटका दे दिया है। ऐसे वक्त में जब नई दिल्ली में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मेज़ पर बैठे हैं, अमेरिका ने भारत पर नया टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रख दिया है।
क्या है ट्रंप का नया दांव? समझें पूरा मामला?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी USTR ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। आरोप यह है कि ये देश बंधुआ मजदूरी यानी Forced Labor से बनी चीज़ों के आयात पर रोक लगाने में नाकाम रहे हैं। यह जांच मार्च 2026 में 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई थी। इसमें भारत, चीन, जापान, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे बड़े देश शामिल हैं।
USTR प्रमुख जैमीसन ग्रीर ने साफ कहा कि अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों का इस मामले में नाकाम रहना बिल्कुल अस्वीकार्य है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मज़दूरों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है और अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धारा 301 क्या है?
यह अमेरिका का एक पुराना कानून है जो 1974 में बना था। इसके तहत USTR किसी भी देश की व्यापार नीतियों की जांच कर सकता है और अगर वो नीतियां अमेरिका के लिए नुकसानदेह पाई जाएं तो उस देश पर टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाया जा सकता है।
सरल शब्दों में समझें, अगर किसी देश में बंधुआ मजदूरी से सामान बना और वो अमेरिका पहुंचा, तो अमेरिका उस पर भारी टैक्स लगा देगा। यह कानून अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वो किसी भी देश की व्यापार नीति को अनुचित या भेदभावपूर्ण पाए तो सुधारात्मक कार्रवाई करे। इन कार्रवाइयों में ऊंचे टैरिफ से लेकर व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध तक शामिल हो सकता है।
भारत ने क्या कहा?
भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि यह मामला दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता के दायरे में सुलझाया जाना चाहिए। भारत ने अमेरिका से यह जांच बंद करने की मांग भी की है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत 2 फरवरी 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।

कपड़ा उद्योग के लिए अलग व्यवस्था
कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए एक अलग विशेष व्यवस्था प्रस्तावित की गई है जिसमें चुनिंदा देशों से एक तय मात्रा तक के आयात पर कम शुल्क लगेगा। इसके अलावा धारा 232 के तहत आने वाले कुछ उत्पादों को इन प्रस्तावित शुल्कों से बाहर रखा गया है।
अभी अंतिम फैसला नहीं, सुनवाई का मौका
यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। 22 जून 2026 तक कोई भी पक्ष सुनवाई में हिस्सा लेने के लिए आवेदन कर सकता है। लिखित आपत्तियां 6 जुलाई तक दी जा सकती हैं और सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई 2026 को होगी। यानी अभी भारत के पास अपना पक्ष रखने का मौका है।
ग्रीर ने यह भी कहा कि कुछ देशों ने इस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं और उन्हें 10% की कम दर पर रखा गया है। लेकिन हर देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैश्विक व्यापार बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न दे।
फिलहाल नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता जारी है और यह नया टैरिफ प्रस्ताव उस बातचीत की मेज़ पर एक बड़ा दबाव बनकर सामने आया है।
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