यूपी में जनशिकायतों पर लापरवाही भारी, 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
UP News: उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने सितंबर में अगस्त के मुकाबले जनशिकायतों में अधिक बढ़ोतरी वाले 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सभी जिलों में थाने और चौकी स्तर पर लंबित शिकायतों की समीक्षा कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और अधिकारियों को संवेदनशीलता व तत्परता से काम करने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में 27 अक्टूबर 2026 को डीजीपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की।
इन 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों पर कार्रवाई के निर्देश
डीजीपी ने सितंबर में अगस्त की तुलना में जनशिकायतों में अत्यधिक बढ़ोतरी वाले 9 जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित थानों की सूची इस प्रकार है:
- खीरी: मैलानी और फरधान
- उन्नाव: सोहरामऊ
- एटा: जसरथपुर
- आगरा: लोहामंडी
- प्रतापगढ़: महेशगंज
- बदायूं: उसावा
- बिजनौर: चांदपुर
- मथुरा: जैत
- लखनऊ: बाबू बनारसीदास
इसके अलावा, सभी जनपदीय पुलिस प्रभारियों को थानों और चौकियों पर लंबित जनशिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें शिकायतों के लंबित रहने के कारणों और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिन के भीतर रेंज और जोन के माध्यम से डीजीपी को भेजनी होगी।
थाने-चौकी पर ही शिकायतों के समाधान पर जोर
समीक्षा बैठक में निर्देश दिए गए कि आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ, पीजी पोर्टल और अन्य माध्यमों से मिलने वाली हर शिकायत को प्राथमिकता से सुना जाए। किसी भी शिकायत को दर्ज करने से मना नहीं किया जाए। हर मामले के निस्तारण की समय-सीमा तय हो, देरी का कारण दर्ज किया जाए और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति बताई जाए।
शिकायतों की संख्या और प्रकृति का विश्लेषण कर उनमें बढ़ोतरी के कारणों का पता लगाने को भी कहा गया है। शिकायतों के पंजीकरण और निस्तारण के आंकड़ों में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हर एसएसपी और एसपी कार्यालय में केंद्रीय निगरानी डेस्क स्थापित की जाएगी। यह डेस्क रोजाना प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का ब्योरा रखेगी। साथ ही, संबंधित थाने और चौकी से लंबित मामलों की जानकारी लेकर उन पर कार्रवाई का फॉलोअप करेगी।
डीजीपी ने कहा कि शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समाधान इस तरह किया जाए कि उन्हें अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय या पुलिस मुख्यालय तक न आना पड़े। थाने या चौकी पर पहुंचने वाले हर फरियादी की बात धैर्य और सम्मान के साथ सुनी जाए। अभद्रता, उपेक्षा, बेवजह टालमटोल, पक्षपात या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
भूमि विवादों की टॉप-10 सूची बनेगी
बैठक में भूमि विवादों के निस्तारण और स्थानीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए भी निर्देश दिए गए। हर थाने को अपने क्षेत्र के 10 प्रमुख भूमि विवादों की सूची तैयार करनी होगी। संबंधित एसीपी या सीओ इन मामलों की निगरानी करेंगे और एसडीएम के साथ समन्वय बनाकर समाधान की कार्रवाई कराएंगे। सूची में शामिल विवाद सुलझने पर अगले 10 लंबित भूमि विवादों को इसमें शामिल किया जाएगा।
पारिवारिक विवादों में संबंधित पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास होगा। वहीं, अवैध कब्जे या कमजोर लोगों को बेदखल करने के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय में विचाराधीन मामलों में अदालती प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पीड़ित की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
यक्ष बीट रिपोर्ट में दर्ज भूमि विवादों को भी संबंधित थाने की विवाद सूची और निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। बीट स्तर से मिली जानकारी का सत्यापन कर विवाद की गंभीरता का आकलन किया जाएगा और जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को समय से सूचना दी जाएगी।
विवादों के समाधान के लिए थाना, सर्किल और जिला स्तर पर विशेष टीमें बनाई जाएंगी। जिन मामलों में पहले दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज हुए हों, मारपीट हुई हो या जातिगत अथवा सांप्रदायिक तनाव की आशंका हो, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे मामलों की रोजाना निगरानी होगी। एसपी स्तर पर बनाई गई विशेष डेस्क भी हर दिन कार्रवाई की समीक्षा करेगी।
शांति भंग की आशंका पर समय से होगी निरोधात्मक कार्रवाई
पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि जिन विवादों में शांति भंग होने या लोक-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, उनसे जुड़े तथ्य सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने समय से पेश किए जाएं। ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 126 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कराई जाए और धारा 135 के तहत जरूरी जांच आगे बढ़ाई जाए।
यदि कोई व्यक्ति मुचलके की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित तथ्य और सबूत सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाएं, ताकि BNSS की धारा 141 के तहत कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जनशिकायतों और विवादों का समयबद्ध, निष्पक्ष और संवेदनशील निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतकर्ताओं को उचित सहायता मिले, संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे। लापरवाही बरतने वाले थानाध्यक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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