एकतरफा प्यार, 27 सेकंड की दरिंदगी और 41 दिन में फांसी की सजा, जानिए Aarav Murder Case की पूरी कहानी

Aarav Murder Case: 30 मई 2026, दोपहर का वक्त शिकोहाबाद की एक गली में खेलती ज़िंदगी को शायद अंदाजा भी नहीं था कि अगले 27 सेकंड एक ऐसी दास्तान लिख देंगे, जिसे सुनकर आज भी रूह कांप जाती है।

महज डेढ़ साल का मासूम आरव जिसे टॉफी दिलाने के बहाने गोद में उठाकर ले जाया गया। कुछ ही कदम दूर सुनसान सड़क पर उसे एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि लगातार आठ बार पक्की सड़क पर पटक दिया गया। उस मासूम की चीखें कुछ ही सेकंड में हमेशा के लिए खामोश हो गईं, लेकिन उस वारदात ने पूरे प्रदेश को हिला दिया।

करीब 41 दिन बाद शुक्रवार को फिरोजाबाद की जिला अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम‘ श्रेणी का अपराध करार दिया।

प्यार में नाकामी… और मासूम से लिया बदला

मूल रूप से अरांव के बामई गांव की रहने वाली रति शर्मा की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पारिवारिक विवाद के चलते वह जनवरी 2026 से अपने मायके में रह रही थीं।

30 मई को वह अपनी मां पिंकी देवी के साथ कानूनी सलाह लेने शिकोहाबाद आई थीं। वकील ने शाम का समय दिया, इसलिए दोनों यादव कॉलोनी स्थित अपनी परिचित के घर चली गईं।

यहीं पहुंचा विराज उर्फ जितेंद्र पाठक, जो रति के पति का रिश्तेदार था। उसने रति के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन साफ इनकार मिल गया। इसी इनकार ने उसके भीतर ऐसी हैवानियत पैदा कर दी कि उसने बदला लेने के लिए मासूम आरव को निशाना बना लिया।

टॉफी का बहाना… और 27 सेकंड की दरिंदगी

विराज ने आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाया और उसे गोद में लेकर घर से बाहर निकल गया।

घर से करीब 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर उसने ऐसी दरिंदगी दिखाई, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। महज 27 सेकंड में उसने मासूम को लगातार आठ बार सड़क पर पटक दिया। गंभीर चोटों से आरव की मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद आरोपी मासूम के शव को घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया।

CCTV बना सबसे बड़ा गवाह

एकतरफा प्यार, 27 सेकंड की दरिंदगी और 41 दिन में फांसी की सजा, जानिए Aarav Murder Case की पूरी कहानी

आरोपी शायद यह भूल गया था कि उसकी पूरी करतूत सड़क किनारे लगे CCTV कैमरे में कैद हो चुकी है।

यही फुटेज पुलिस जांच और कोर्ट में सबसे अहम वैज्ञानिक साक्ष्य बना। अभियोजन पक्ष ने मजबूत गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर अदालत में आरोपी के खिलाफ ऐसा केस तैयार किया कि बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं।

कुछ घंटों में गिरफ्तारी, 41 दिन में फांसी

वारदात के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसके पैर में गोली भी लगी।

जांच तेजी से पूरी की गई। पुलिस ने महज 6 दिन में चार्जशीट दाखिल की और रिकॉर्ड समय में सुनवाई पूरी हुई।

शुक्रवार को दोपहर करीब 2:45 बजे जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने फैसला सुनाते हुए विराज को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का है और दोषी किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है।

सजा सुनते ही अदालत में मौजूद विराज फूट-फूटकर रोने लगा। वहीं, आरव की नानी पिंकी देवी ने फैसले को न्याय की जीत बताया।

Aarav Murder Case: एक नजर में

  • 30 मई 2026 को टॉफी दिलाने के बहाने मासूम आरव की हत्या।
  • उसी रात पुलिस मुठभेड़ में आरोपी विराज गिरफ्तार।
  • 6 दिन में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
  • 41वें दिन कोर्ट ने दोषी को फांसी और ₹50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।

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