जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल मामले में 5 और संदिग्ध गिरफ्तार
Sandesh Wahak Digital Desk: गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संदिग्ध मॉड्यूल के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। एटीएस ने इस नेटवर्क से जुड़े पांच और आरोपियों को दबोचा है। इस महीने की शुरुआत में हुई 8 गिरफ्तारियों के बाद, इन नई गिरफ्तारियों से इस आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ चल रही जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है। एटीएस के अनुसार, ये गिरफ्तारियां पहले पकड़े गए आरोपियों से रिमांड के दौरान मिली खुफिया जानकारियों और पुख्ता सबूतों के आधार पर की गई हैं।
राज्य के अलग-अलग जिलों से दबोचे गए आरोपी
सुरक्षा एजेंसी का दावा है कि पकड़े गए ये पांचों आरोपी जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय नेटवर्क का हिस्सा थे। जांच में यह भी सामने आया है कि वे पहले से जेल में बंद आरोपियों के साथ मिलकर विस्फोटक उपकरणों (IEDs) की टेस्टिंग करने की गतिविधियों में लिप्त थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बिलाल आबिद शेरा, मोहम्मद अय्यूब कदीवाल उर्फ मोहम्मद खदियासन, मोहम्मद शफी मुखी उर्फ शफी चापी, मोहम्मद हसन करादिया उर्फ हसन हैदरपुरी और मोहम्मद अय्यूब सुनासरा उर्फ मोहम्मद खली के रूप में हुई है। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था, जिनमें से इन पांचों की संलिप्तता पाए जाने पर इन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। ये सभी आरोपी गुजरात के विभिन्न जिलों के निवासी हैं।
यूएपीए के तहत मामला दर्ज
एटीएस की यह कार्रवाई 3 जुलाई को शुरू किए गए उस बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसके तहत सबसे पहले जैश से संबंध रखने के आरोप में 8 लोगों को उठाया गया था। उन 8 आरोपियों में से 7 गुजरात के और एक मध्य प्रदेश का रहने वाला था। इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एटीएस का आरोप है कि यह पूरा गिरोह गुजरात में प्रतिबंधित संगठन का स्लीपर सेल या सक्रिय नेटवर्क तैयार करने, युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें जोड़ने और पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लगातार संपर्क में रहने का काम कर रहा था।
गुजराती भाषा में अनुवादित जैश का साहित्य और डिजिटल साक्ष्य बरामद
शुरुआती तफ्तीश के दौरान एटीएस ने घटनास्थलों से करीब 254 संदिग्ध सामग्रियां जब्त की हैं। इनमें जैश-ए-मोहम्मद के बैनर, झंडे और भारी मात्रा में जिहादी डिजिटल कंटेंट शामिल है। जांच एजेंसी ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कुछ आरोपियों ने संगठन की हिंसक विचारधारा को स्थानीय स्तर पर फैलाने के लिए जैश के कट्टरपंथी साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद भी किया था। अधिकारियों का कहना है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे निर्देशों पर काम कर रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य गुजरात में आतंकी गतिविधियों के लिए एक मजबूत लॉजिस्टिक और सहयोगी नेटवर्क खड़ा करना था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों के डिजिटल इनपुट्स और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं।
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