पीएम मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, एक साथ सफर कर सकेंगे 2,600 यात्री
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय रेलवे को पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में आज एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड पैसेंजर ट्रेन का उद्घाटन किया। डीजल और पारंपरिक बिजली से चलने वाली ट्रेनों की तुलना में यह नई तकनीक पूरी तरह से अलग और क्रांतिकारी है, जो आने वाले समय में भारतीय रेल का चेहरा बदल देगी।
कैसे काम करती है यह अनूठी तकनीक
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपने साथ प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) नाम का एक छोटा इन-बिल्ट पावर प्लांट लेकर चलती है। ट्रेन में लगे विशेष सिलेंडरों में सुरक्षित रखी गई हाइड्रोजन गैस, वायुमंडल की ऑक्सीजन के साथ मिलकर एक विद्युत-रासायनिक (Electrochemical) प्रतिक्रिया करती है। इस पूरी प्रक्रिया से सीधे बिजली पैदा होती है, जो ट्रेन की मोटरों को घुमाती है और पहियों को रफ्तार देती है।
जादू जैसा है इसका पर्यावरण लाभ
पारंपरिक इंजनों के विपरीत, इस हाइड्रोजन ट्रेन में किसी भी तरह का ईंधन जलाया नहीं जाता है। यही कारण है कि इससे किसी भी प्रकार का धुआं या हानिकारक कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद (By-product) के रूप में केवल भाप (जलवाष्प) और थोड़ी सी ऊष्मा (गर्मी) निकलती है, जो पर्यावरण को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचाती।
इन स्टेशनों से होकर गुजरेगी ट्रेन
उत्तर रेलवे के अनुसार, इस अत्याधुनिक ट्रेन का पहला कमर्शियल संचालन जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जा रहा है। यह ट्रेन जींद जंक्शन और सोनीपत के बीच गोहाना जंक्शन से होकर गुजरेगी। इसके साथ ही यह मार्ग में आने वाले प्रमुख ठहरावों पर भी रुकेगी, जिनमें जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, इसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत की बड़ी छलांग
दुनिया के अन्य देशों में वर्तमान में चल रही अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच ही होते हैं और उनका उपयोग सीमित क्षेत्रीय आवाजाही के लिए होता है। इसके उलट, भारतीय रेलवे ने दुनिया को चौंकाते हुए इसे 10 डिब्बों वाले एक विशाल यात्री ट्रेनसेट के रूप में विकसित किया है। यह ट्रेन एक बार में लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में पूरी तरह सक्षम है, जो यह साबित करता है कि भारत ने इस हरित तकनीक को बड़े पैमाने पर उपयोग करने की महारत हासिल कर ली है।
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