UP News: पूर्व आईएएस को सलाहकार बनाकर दे रहे 15 हजार रोजाना मानदेय

यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी के अफसरों की दरियादिली, तुलनात्मक रूप से मुख्य सचिव का वेतन भी इससे कम

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी में अफसरों को शाहखर्ची से परहेज नहीं है। तभी मनमाफिक तरीके से ऐसे रिटायर आईएएस को सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया है।

जिनको प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जा रहा है। अगर मुख्य सचिव को दिए जा रहे प्रतिमाह को कुल वेतन की गणना प्रतिदिन के हिसाब से की जाए तो सलाहकार साहब उनसे भी काफी आगे निकलेंगे। दूसरे वित्तीय सलाहकार पर भी लाखों रुपए प्रतिमाह फूंके जा रहे हैं।

15 हजार रुपये प्रतिदिन तय हुआ था मानदेय

31 जनवरी 2015 को रिटायर हुए 1993 बैच के आईएएस सुधीर कुमार श्रीवास्तव को तकरीबन दो साल पहले फैकल्टी में प्रशासनिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। श्रीवास्तव बस्ती कमिश्नर व ग्राम्य विकास सचिव समेत कई पदों पर तैनात रह चुके हैं। विभाग में अहम पद पर तैनात आईएएस के गुरु समझे जाने वाले श्रीवास्तव की नियुक्ति को फैकल्टी की जनरल बॉडी ने हरी झंडी दिखाते हुए मानदेय 15 हजार रुपए प्रतिदिन तय किया था। इस लिहाज से 30 दिनों तक दफ्तर आकर काम करने पर उन्हें साढ़े चार लाख रुपए प्रतिमाह वेतन मिल सकता है।

वहीं दूसरी तरफ नौकरशाही के मुखिया मुख्य सचिव को लेवल 17 पे बैंड के तहत प्रति माह तीन लाख 44 हजार 250 रुपए बतौर वेतन मिलता है। इस वेतन की गणना प्रति दिन के हिसाब से होने पर आंकड़ा 11 हजार 475 रुपए बैठेगा। वहीं सचिव पद पर बैठे आईएएस को तय वेतनमान दो लाख 24 हजार 100 रुपए मासिक मिलता है। ये प्रतिदिन के हिसाब से 7470 रुपए बैठेगा। पूर्व आईएएस श्रीवास्तव को पेंशन भी मिलती है।

हालांकि बचाव में अफसरों के तर्क हैं कि सलाहकार रोजाना दफ्तर नहीं आते हैं। सूत्रों की माने तो सलाहकार श्रीवास्तव के घर में पहले से तैनात नौकर को भी फैकल्टी में जुगाड़तंत्र के जरिये आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मी दिखाकर अफसर 15 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दे रहे हैं। इस आरोप की जांच जरूरी है। सचिव आलोक कुमार ने इससे इंकार किया है।

नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज महानिदेशालय में: सचिव

यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी के सचिव आलोक कुमार ने कहा कि जीबी के जरिये प्रशासनिक और वित्तीय दोनों सलाहकारों की नियुक्ति हुई है। संबंधित दस्तावेज चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय में हैं। सुधीर श्रीवास्तव को शायद दस हजार रुपए प्रति मामले का भुगतान किया जाता है। ज्यादा जानकारी अकाउंट सेक्शन से मिलेगी। सचिव साहब से जब पूछा गया कि क्या सुधीर श्रीवास्तव चंद घंटे ही दफ्तर में बैठते हैं तो उन्होंने खंडन करते हुए कहा कि जरूरत पडऩे पर अक्सर देर रात तक बैठकर काम करते हैं।

वित्तीय सलाहकार पर भी लुटाए जा रहे प्रतिमाह लाखों रुपये

मेडिकल फैकल्टी में पहले सचिवालय सेवा के विशेष सचिव रिजवी को सलाहकार के तौर पर प्रतिमाह सिर्फ 50 से 60 हजार रुपए वेतन पर रखा गया था। इसी तरह पूर्व सीएम मायावती के पर्सनल फिजियोथेरेपिस्ट भट्ट को मेडिकल फैकल्टी के तत्कालीन सचिव डॉ. राजेश जैन ने तत्कालीन कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के निर्देश पर उपकृत करने के लिए नियुक्त किया था। अब फाइनेंस से संबंधित सलाह देने के लिए पूर्व वित्त नियंत्रक संजय श्रीवास्तव को भी फैकल्टी में बतौर वित्तीय सलाहकार रखा गया है। जिन्हे लाखों रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। जबकि अकाउंटेंट मौजूद है।

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