कानपुर में CMO की कुर्सी बनी विवाद की वजह, दो अधिकारी आमने-सामने, असमंजस में पूरा स्वास्थ्य महकमा!
Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों चर्चा में है, लेकिन वजह हैरान करने वाली है। यहां एक ही ज़िले में दो-दो मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अपने-अपने पद का दावा कर रहे हैं, जिससे हालात बेहद असामान्य हो गए हैं। सरकारी दफ्तर अब एक प्रशासनिक नाटक का मंच बन गया है, जहां दो अधिकारी एक ही कुर्सी के लिए आमने-सामने बैठे हैं।

मामला तब गरमा गया जब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डॉ. हरिदत्त नेमी के निलंबन पर रोक लगाते हुए उन्हें अंतरिम राहत दी। इसके तुरंत बाद, बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे डॉ. नेमी ने रामादेवी स्थित CMO कार्यालय में पहुंचकर अपनी कुर्सी संभाल ली। उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद वे ही कानपुर के वास्तविक CMO हैं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पहले से पद पर कार्यरत डॉ. उदयनाथ ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया। उन्होंने ऑफिस में बगल की कुर्सी खींचकर बैठते हुए साफ कहा “मैं भी CMO हूँ!”
अब हालात ये हैं कि एक ही टेबल पर दो अफसर साथ बैठकर खुद को असली CMO बता रहे हैं, जिससे पूरा स्टाफ पशोपेश में है कि किसके आदेश माने जाएं और किसके दस्तखत को वैध माना जाए। इस टकराव की वजह से दफ्तर की फाइलें अटक गई हैं, रोज़मर्रा के प्रशासनिक काम ठप पड़ गए हैं और सबसे बड़ी चिंता आम जनता से जुड़े स्वास्थ्य सेवाओं की है, जो सीधे प्रभावित हो रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चकेरी पुलिस ने कार्यालय में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी संभावित विवाद को टाला जा सके।

पिछले विवादों की पृष्ठभूमि
डॉ. हरिदत्त नेमी ने 14 दिसंबर को CMO पद का कार्यभार संभाला था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद, 19 जून को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह से विवाद के चलते उनका निलंबन कर दिया गया। निलंबन के बाद डॉ. नेमी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीएम पर गंभीर आरोप लगाए जिसमें जातिसूचक भाषा का प्रयोग, भ्रष्टाचार के लिए दबाव डालना और पक्षपात जैसे मुद्दे शामिल थे। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था।
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यह विवाद राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया। बीजेपी के भीतर ही नेताओं की राय बंटी हुई नज़र आई। एक ओर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, एमएलसी अरुण पाठक और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने CMO का पक्ष लिया, तो दूसरी ओर विधायक अभिजीत सिंह सांगा और महेश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डीएम का समर्थन किया।
अब बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। जनता का सवाल अब यही है कि जब खुद स्वास्थ्य विभाग ही बीमार हालत में है, तो ज़िले की जनता का इलाज कौन करेगा?
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