संतकबीरनगर में पुलिस हिरासत में बुजुर्ग की मौत, परिवार ने बर्बरता का लगाया आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: संतकबीरनगर जनपद के महुली थाना क्षेत्र के नगुआ गांव में मंगलवार सुबह एक बुजुर्ग की पुलिस अभिरक्षा में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। 65 वर्षीय राम किशुन की मौत की खबर फैलते ही गांव में तनाव फैल गया। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं और शव को अंतिम संस्कार के लिए देने से इनकार कर दिया।
घटना सुबह करीब 9 बजे की है, जब पुलिस राम किशुन को एक पुराने केस में चौकी लेकर आई थी। थोड़ी ही देर में उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें पास के निजी डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
नगुआ गांव के हरिजन बस्ती निवासी राम किशुन पुत्र बुझई, एक पुराने मारपीट के मामले में वांछित थे। जानकारी के मुताबिक, 2011 में गांव में हुए झगड़े में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर केस दर्ज कराया था। कोर्ट से राम किशुन और एक अन्य व्यक्ति मतई के खिलाफ वारंट जारी हुआ था।
मंगलवार सुबह करीब 8 बजे, शनिचरा बाबू पुलिस चौकी से तीन सिपाही और एक एसआई बाइक पर गांव पहुंचे और बिना कुछ कहे सीधे राम किशुन के घर में घुस गए। परिजनों के मुताबिक, उन्हें धमकाते हुए घर से उठाकर ले गए।
कुछ देर बाद खबर आई कि राम किशुन की तबीयत बिगड़ गई है। आनन-फानन में पुलिस उन्हें एक निजी डॉक्टर के पास ले गई, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद गांव में तनाव फैल गया और परिजनों ने शव को घर लाकर हंगामा शुरू कर दिया।
परिजनों के आरोप और गांव में गुस्सा
मृतक की बेटी साधना और पत्नी चंद्रावती देवी ने आरोप लगाया कि पुलिस की दबंगई और मारपीट की वजह से राम किशुन की मौत हुई है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं और शव का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक दिल्ली में रहने वाले उनके चारों बेटे गांव नहीं पहुंचते, तब तक वे शव को अंतिम क्रिया के लिए नहीं देंगे।
पुलिस की प्रतिक्रिया और प्रशासन की कोशिश
घटना की जानकारी मिलते ही महुली थानाध्यक्ष रजनीश राय मौके पर पहुंचे। हालात बिगड़ते देख दो थानों की अतिरिक्त फोर्स गांव में तैनात कर दी गई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा खुद गांव पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। पुलिस का कहना है कि राम किशुन की मौत अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण हुई। वहीं, परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।
पृष्ठभूमि में क्या था विवाद?
गांव में वर्ष 2011 में एससी/एसटी एक्ट के तहत एक केस दर्ज हुआ था, जिसमें राम किशुन शिकायतकर्ता थे। बाद में दूसरे पक्ष ने भी उन पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई। दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, लेकिन अदालत में कोई दस्तावेज जमा नहीं किए गए। इसी वजह से केस जारी रहा और अंततः वारंट जारी हो गया।
फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में परिजनों को समझाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, ग्रामीणों की मांग है कि जब तक मृतक के बेटे गांव नहीं पहुंचते और न्याय की ठोस गारंटी नहीं मिलती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
Also Read: UP News: करंट लगने से झुलसे बच्चे के काटने पड़े हाथ; SDO-JE समेत चार के खिलाफ FIR

