Lucknow News: SGPGI और छांव फाउंडेशन की पहल, एसिड सर्वाइवर्स के लिए खास मेडिकल कैंप

Sandesh Wahak Digital Desk: प्लास्टिक सर्जरी दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जहां ज़ख्मों से जूझती ज़िंदगियों को राहत का एक नया एहसास मिला। छांव फाउंडेशन और एसजीपीजीआईएमएस (संजय गांधी पीजीआई) के प्लास्टिक सर्जनों की संयुक्त पहल पर शीरोज़ हैंगआउट कैफे में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए एक विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।

इस शिविर में पीड़ित महिलाओं को निःशुल्क चिकित्सीय परामर्श दिया गया। खास बात यह रही कि कार्यक्रम का आयोजन उसी जगह हुआ जहां एसिड अटैक सर्वाइवर्स खुद आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं शीरोज़ हैंगआउट कैफे।

जब इलाज बना सहारा, और इंसानियत बनी आवाज़

शिविर में एसजीपीजीआई के 9 अनुभवी प्लास्टिक सर्जन और 3 नर्सिंग स्टाफ ने पूरी संजीदगी से हर पीड़िता की स्थिति को समझा और उन्हें आगे की सर्जरी और उपचार से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी। यह पहल न सिर्फ शारीरिक इलाज तक सीमित रही, बल्कि इन महिलाओं के आत्मविश्वास को भी संबल देने वाली साबित हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत छांव फाउंडेशन के सह-संस्थापक आशीष शुक्ला के स्वागत भाषण से हुई। एसजीपीजीआई की टीम के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा, “इन सर्जनों का योगदान केवल मेडिकल नहीं है, यह एक समाज को संवारने का प्रयास है।”

ज़ख्मों की समझ और सर्जरी की शक्ति

एसजीपीजीआई के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. राजीव सिंह ने प्लास्टिक सर्जरी की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ऐसे पीड़ितों के लिए संस्थान पूरी तरह से समर्पित है और उन्हें निःशुल्क, असीमित सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने ऑनलाइन व खुली एसिड बिक्री पर सख्त प्रतिबंध की मांग करते हुए कहा कि जब तक ऐसे रसायन खुलेआम मिलते रहेंगे, तब तक ये घटनाएं थमती नहीं दिखेंगी।

कार्यक्रम में डॉ. राजीव अग्रवाल द्वारा तैयार की गई “एसिड अटैक इंजरी – सूचना पुस्तिका” का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए एक गाइड के रूप में काम करेगी, जिससे वे इलाज की प्रक्रिया को बेहतर समझ सकें।

जब सम्मान के साथ जुड़ी संवेदनाएं

मुख्य अतिथि सुधीर हलवासिया का स्वागत एक सर्वाइवर ने गुलदस्ते और हस्तनिर्मित कलाकृति के साथ किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने पीड़ितों की हिम्मत को सलाम किया और आयोजकों के जज्बे की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में सभी चिकित्सकों को उनके निस्वार्थ सेवा के लिए स्मृति चिह्न भेंट किए गए, जिससे यह दिन यादगार बन गया न सिर्फ पीड़ितों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जिन्होंने समाज को बेहतर बनाने में योगदान दिया।

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