Lucknow News: ‘पाठशाला नहीं, मधुशाला चाहिए सरकार को’, स्कूल मर्जर के खिलाफ सपा यूथ ब्रिगेड का प्रदर्शन
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के 5 हजार प्राथमिक विद्यालयों को आपस में मर्ज (विलय) करने के फैसले को लेकर न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं, बल्कि सियासत भी गर्मा गई है। खासकर गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के भविष्य से जुड़े इस फैसले के विरोध में समाजवादी पार्टी की यूथ ब्रिगेड ने बुधवार को लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए नारेबाज़ी की और पोस्टरों के ज़रिए योगी सरकार की शिक्षा नीति की तीखी आलोचना की। उनके हाथों में जो स्लोगन लिखे थे, वे स्पष्ट रूप से सत्ता की मंशा और प्राथमिक शिक्षा के प्रति उदासीन रवैये पर सवाल खड़े कर रहे थे।

हम स्कूल बचाएंगे, सरकार को मधुशाला चाहिए!
बुधवार दोपहर करीब दर्जनभर सपा यूथ ब्रिगेड के सदस्य हजरतगंज चौराहे पर जुटे और बीच सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। “हम स्कूल बचाएंगे”, “पाठशाला नहीं, मधुशाला चाहिए योगी सरकार को”, “अखिलेश यादव जिंदाबाद” जैसे नारों से चौराहा गूंज उठा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार प्रदेश में शिक्षा को पीछे धकेलकर, शराब और कॉर्पोरेट संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला गरीब और वंचित तबकों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की सोची-समझी साजिश है।
स्कूल बंद, शराब की दुकानें चालू — ये कैसा विकास?
प्रदर्शन में कुछ कार्यकर्ताओं के हाथों में ऐसे पोस्टर भी थे जिन पर लिखा था, “PDA जननायक, हम स्कूल बचाएंगे” और “यूपी में जंगलराज चरम पर है”। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जब स्कूलों में ताले पड़ रहे हैं, तब हर गली-नुक्कड़ पर शराब की दुकानें खुल रही हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार न सिर्फ शिक्षा छीन रही है, बल्कि युवाओं की आवाज़ को दबाने का भी काम कर रही है। उनके मुताबिक, यह फैसला संविधान के उस मूल अधिकार के खिलाफ है, जो हर बच्चे को शिक्षा का हक देता है।
जब तक पढ़ा-लिखा नेतृत्व नहीं आएगा, सुधार नहीं होगा
सपा यूथ ब्रिगेड का साफ कहना था कि जब तक अखिलेश यादव जैसे पढ़े-लिखे और संवेदनशील नेता सत्ता में नहीं लौटेंगे, तब तक प्रदेश की शिक्षा और लोकतंत्र दोनों खतरे में रहेंगे।
करीब 10 मिनट चले इस प्रदर्शन से हजरतगंज चौराहे पर थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस ने स्थिति संभालते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया, जहां उन्हें अस्थायी रूप से रोका गया।
सरकार का तर्क बनाम विपक्ष का आरोप
दरअसल, प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने 5000 ऐसे प्राथमिक स्कूलों की पहचान की है जहां छात्र संख्या बेहद कम है। सरकार का तर्क है कि इन स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में मर्ज करने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा।
हालांकि, विपक्ष इसे गरीब तबके के बच्चों की शिक्षा छीनने वाला कदम बता रहा है। सपा यूथ ब्रिगेड ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ स्कूल बचाने के लिए नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी ज़रूरी है।
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