लखनऊ में ‘सात्यकि: द्वापर का अजेय योद्धा’ का भव्य विमोचन, पद्मश्री मालिनी अवस्थी समेत कई दिग्गज रहे मौजूद

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित पुस्तक स्टोर यूनिवर्सल बुक सेलर्स में रविवार को एक ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन देखने को मिला। मशहूर फिल्म निर्देशक और लेखक दुष्यंत प्रताप सिंह की चर्चित पौराणिक कृति ‘सात्यकि: द्वापर का अजेय योद्धा’ का भव्य विमोचन पद्मश्री मालिनी अवस्थी, शिक्षाविद राजेश दयाल, यूनिवर्सल बुक सेलर्स के सीईओ गौरव प्रकाश, और स्वयं लेखक की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह पुस्तक महाभारत काल के अद्वितीय योद्धा सात्यकि के जीवन पर आधारित है, जिन्हें आम जनमानस में अपेक्षाकृत कम जाना जाता है। यह कथा उस वीरता, निष्ठा और सांस्कृतिक गौरव की पुनः स्मृति दिलाती है जो भारत के प्राचीन इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

मालिनी अवस्थी: ऐसे योद्धाओं की गाथाएं पीढ़ियों को प्रेरणा देती हैं

लोकगायिका और पद्मश्री सम्मानित मालिनी अवस्थी ने इस अवसर पर गहरी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा हमारे लोकगीतों में जिन गुमनाम योद्धाओं की झलक मिलती है, उन्हें जब साहित्य में स्थान मिलता है तो यह सिर्फ लेखन नहीं, एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण होता है। सात्यकि जैसे चरित्र आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महाकाव्यात्मक साहित्य को समर्थन और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।

राजेश दयाल: यह पुस्तक नहीं, एक युग दस्तावेज है

प्रख्यात शिक्षाविद राजेश दयाल ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे “इतिहास के भूले-बिसरे अध्याय का पुनर्पाठ” बताया। उन्होंने कहा ऐसी रचनाएं पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में जरूर पहुंचनी चाहिए। ये सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव को संजोने वाले दस्तावेज हैं। ऐसी किताबें युवाओं में जड़ से जुड़ाव और जिम्मेदारी का भाव पैदा करती हैं।

गौरव प्रकाश: “व्यापार से ज़्यादा सांस्कृतिक दायित्व”

यूनिवर्सल बुक सेलर्स के सीईओ गौरव प्रकाश ने इस किताब को अपनी शेल्फ पर पाकर गर्व व्यक्त करते हुए कहा जब इतिहास और संस्कृति को जोड़ने वाली किताबें हमारे पास आती हैं, तो यह केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन लगता है। सात्यकि जैसी कृतियों की उपलब्धता पाठकों के लिए एक अनमोल अनुभव है।

लेखक दुष्यंत प्रताप सिंह: यह सिर्फ किताब नहीं, एक भावनात्मक सफर है

इस पुस्तक के लेखक और फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने बताया कि इस कृति को तैयार करने में उन्हें करीब दो वर्ष का समय लगा। इस दौरान उन्होंने महाभारत, पुराणों और प्राचीन ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने कहा यह किताब मेरे लिए सिर्फ लेखन का कार्य नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और वैचारिक यात्रा रही है। सात्यकि जैसे महानायक को नई पीढ़ी तक पहुंचाना मेरा उद्देश्य था।

उन्होंने आगे जानकारी दी कि पुस्तक का ऑडियो वर्जन लगभग 8.5 घंटे का है, जिसमें इंडस्ट्री के नामी टेक्नीशियनों ने योगदान दिया है। यह ऑडियो सभी प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि किताब का अंग्रेजी संस्करण अक्टूबर में रिलीज़ किया जाएगा, और इस पर जल्द ही एक वेब सीरीज़ का निर्माण भी प्रस्तावित है।

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