Lucknow News: फर्जी CBI अधिकारी बनकर 56 लाख की ठगी, तीन शातिर बदमाश गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों ने फर्जी CBI अधिकारी बनकर एक महिला को डिजिटल हाउस अरेस्ट में रखते हुए उससे 56 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामले में साइबर क्राइम थाना, लखनऊ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य सरगना समेत तीन शातिर जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया है।

इस धोखाधड़ी का शिकार बनीं वादिनी रीता भसीन ने 18 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताया। कॉलर ने डराया कि उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग व अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है और उनके खिलाफ मुंबई के अंधेरी ईस्ट थाने में एफआईआर दर्ज है।

इसके बाद उन्हें एक WhatsApp वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी में आकर धमकाया और कहा कि उन्हें जेल भेजा जाएगा। इस डर से वादी को एकांत कमरे में रहने, किसी से बात न करने और 99% संपत्ति सुप्रीम कोर्ट के खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया। फर्जी कोर्ट ऑर्डर और अरेस्ट वारंट दिखाकर आरोपियों ने ₹56 लाख ठग लिए।

आरोपियों की गिरफ्तारी और छानबीन

पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें निरीक्षक रणधीर सिंह यादव, उपनिरीक्षक कपिल कुमार, मुख्य आरक्षी मित्रसेन यादव, आरक्षी गोविन्द सिंह व मधुरेन्द्र प्रताप सिंह शामिल थे। तकनीकी जांच और इनपुट के आधार पर 24 जुलाई को लखनऊ से तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले 23 जुलाई को इसी मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम और ठगी का सामान

  • मोहम्मद जैद, पुत्र सलमान, निवासी खुर्रम नगर, थाना इन्दिरानगर, लखनऊ (उम्र 27 वर्ष)
  • मोहन कुमार रावत, पुत्र शत्रोहन लाल, निवासी सुगामऊ, इन्दिरानगर, लखनऊ (उम्र 27 वर्ष)
  • चित्रांश कुंवर, पुत्र राकेश चंद्र, निवासी 72A इन्दिरानगर, लखनऊ (उम्र 26 वर्ष) – मुख्य सरगना

इनके पास से बरामद हुए

  • 7 मोबाइल फोन
  • ₹1,70,000/- नकद
  • 11 डेबिट कार्ड
  • 2 क्रेडिट कार्ड
  • 3 चेकबुक
  • ठगी से खरीदी गई महंगी थार कार

ठगी का तरीका

ये साइबर अपराधी खुद को CBI, पुलिस या प्रवर्तन निदेशालय जैसे केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बताकर फोन पर डराने की चाल चलते हैं। वे पीड़ित को बताते हैं कि उनका मोबाइल और आधार किसी मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस स्टेशन जैसे सेटअप में वर्दीधारी बनकर उन्हें धमकाते हैं।

इस दौरान पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा जाता है यानी वीडियो कॉल से हर वक्त नजर रखी जाती है, परिवार से बातचीत तक नहीं करने दी जाती, और लाखों की रकम कोर्ट या सरकारी खाते के नाम पर ट्रांसफर करवा ली जाती है। ठगी की रकम को ये अपराधी कई बैंक खातों, कार्ड्स और अंत में क्रिप्टो करेंसी USDT में कन्वर्ट करके आपस में बांट लेते हैं।

लखनऊ पुलिस की अपील

लखनऊ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति यदि खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर धमकाता है, तो उसकी बातों में न आएं और तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें। साथ ही, किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

 

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