तिहाड़ में वसूली रैकेट पर हाई कोर्ट सख्त, CBI को दर्ज करनी होगी FIR
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल के भीतर चल रहे कथित वसूली गिरोह के मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए CBI को FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को “आश्चर्यजनक” माना जा सकता है और सरकार को इस पर जल्द व गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह मामला जेल के अंदर अधिकारियों और कैदियों की कथित मिलीभगत से वसूली करने के आरोपों से जुड़ा है।
CBI की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सोमवार को सीबीआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट में संकेत मिला कि तिहाड़ जेल में कई तरह की अवैध और भ्रष्ट गतिविधियां हो रही हैं, जिनमें कैदी और जेल अधिकारी दोनों शामिल हैं। अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी, जिसमें सीबीआई अपनी कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करेगी।
दिल्ली सरकार को भी मिली चेतावनी
कोर्ट ने 2 मई को दिल्ली सरकार के गृह विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को निर्देश दिया था कि मामले की गहन जांच कर सच सामने लाएं और प्रशासनिक व सुपरविजन में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करें। हालांकि सरकारी वकील ने सोमवार को कहा कि जांच पूरी करने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता है।
जेल के अंदर ‘पैसे के बदले सुविधा’ का खेल
याचिका में आरोप है कि जेल के भीतर कुछ सुविधाएं दिलाने के नाम पर एक संगठित गिरोह, जेल अधिकारियों की मदद से कैदियों और उनके परिजनों से धन उगाही करता है। कोर्ट ने सीबीआई वकील से कहा कि जांच केवल जेल अधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें शामिल सभी व्यक्तियों — कैदियों के रिश्तेदारों और यहां तक कि याचिकाकर्ता — की भी जांच की जाए।
यह मामला एक पूर्व कैदी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि तिहाड़ में पैसे लेकर कैदियों को सुविधाएं दी जाती हैं और न देने पर उन्हें परेशान किया जाता है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
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