यूपी में आशिक मिजाज आईएएस अफसरों पर कार्रवाई टेढ़ी खीर
पूर्व में संगीन आरोपों से घिरे ऐसे नौकरशाह प्रमुख सचिव और कमिश्नर जैसे अहम पदों पर भी बैठे हैं
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: तेरी आंखों में जब से मैंने अपना अक्स देखा है, मेरे चेहरे को कोई आइना अच्छा नहीं लगता…किसी शायर के इन अल्फाजों को चंद आईएएस ने मानो अपना मिजाज बना रखा है। कई अफसरों का दामन ऐसे संगीन आरोपों से दागदार है।

फेहरिस्त में नया नाम नोएडा में अपर आयुक्त राज्य कर के पद पर तैनात 2018 बैच के युवा आईएएस का है। हालांकि विभागीय महिला अफसरों द्वारा सीएम योगी से शिकायत के बाद भले जांच के आदेश हो चुके हैं।

लेकिन इससे पहले भी कई आईएएस आशिक मिजाजी में सुर्खियां बटोर चुके हैं। कुछ तो प्रमुख सचिव और कमिश्नर जैसे अहम पदों पर भी बैठे हैं। इन आईएएस अफसरों के खिलाफ कभी सख्त कार्रवाई आज तक नहीं हुई। जो बाकी अफसरों के लिए नजीर साबित हो सके। नियुक्ति विभाग की फाइलों में ऐसी कई शिकायतें दफन हैं।
कई अहम पदों पर बैठे हैं ऐसे नौकरशाह
2012 में रेलवे पुलिस ने लखनऊ मेल जैसी वीआईपी ट्रेन में महिला से छेड़छाड़ में एक आईएएस को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। उक्त अफसर एक मंडल में कमिश्नर के पद पर विराजमान है। अगला नंबर एक अहम महकमे में तैनात सचिव रैंक के आईएएस का है। जो एक प्रमुख मंडल के कमिश्नर की तैनाती के दौरान चर्चा में आये थे। जिले में एक जूनियर अफसर (आईएएस या आईपीएस) की पत्नी से इन्होंने इश्क फरमाया तो जंगल में आग की तरह खबर फैलते देर नहीं लगी। नियुक्ति विभाग तक शिकायत आते ही सिर्फ तबादला किया गया।

इसी तरह कुछ समय पहले एक जिले में तैनात सीडीओ के ऊपर एक मिशन में कार्यरत महिला ने अश्लीलता के संगीन आरोप लगाते हुए सीधे केंद्र को शिकायत भेजी। जहां से कार्रवाई के लिए यूपी के नियुक्ति विभाग से कहा गया। विभागीय अफसरों ने इसे सही नहीं माना। उनके मुताबिक एक घोटाले में कार्रवाई करने के कारण ऐसा किया गया। उक्त आईएएस फिलहाल एक जिले में डीएम के पद पर हैं। अगला नंबर वर्तमान प्रमुख सचिव का है। जो यूपी के वीआईपी जिले में डीएम रहते तब चर्चा में आये थे, जब उन्होंने विवाहित महिला आईएएस एसडीएम को रात दो बजे फाइल लेकर बुलाना शुरू किया। उन्होंने बंद कमरे में प्यार का इजहार तक कर दिया था। महिला आईएएस ने सीधे सीएम से शिकायत की। कुछ वर्षों पहले एक आईएएस की बीएसए संग अय्याशी ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
चाहे जिस ओहदे पर चले जाएं, नारी सिर्फ भोग्या समान
राजधानी में मनोविज्ञान की एक प्रोफेसर ऐसे प्रकरणों को पूरी तरह कुंठा का मामला बताती हैं। वे कहती हैं, यह एक प्रवृत्ति है। कुछ ऐसे लोग होते है जो चाहे जिस ओहदे पर चले जाएं, नारी उनके लिए भोग्या ही है। यह काफी हद तक उनके उस सामाजिक परिवेश पर निर्भर करता है, जिसमें वे पले-बढ़े हैं। कुत्सित सोच की उपच का यह भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है।

